बोगोटा (कोलंबिया): पिछले वर्ष के अंत में अमेज़न सहयोग संधि संगठन (ACTO) के आठ देशों ने आदिवासी समुदायों को औपचारिक रूप से संगठन के व्यस्थापन ढांचे में शामिल करने पर सहमति जताई, जिससे उन्हें क्षेत्रीय निर्णय-प्रक्रिया में स्थायी और संरचित भूमिका मिली। यह संगठन की स्थापना को चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद पहली बार हुआ है।
यह निर्णय हाल ही में बोगोटा में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान लिया गया, जहां विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेज़न आदिवासी जन तंत्र की स्थापना को मंजूरी दी। इस तंत्र का उद्देश्य वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी ACTO की नीतियों और कार्यक्रमों में आदिवासी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
सन 1978 में स्थापित ACTO में बोलीविया, ब्राज़ील, कोलंबिया, इक्वाडोर, गुयाना, पेरू, सूरीनाम और वेनेज़ुएला शामिल हैं और यह अमेज़न घाटी में सहयोग के लिए प्रमुख अंतर-सरकारी मंच के रूप में कार्य करता है। हालांकि इसका जनादेश लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय समन्वय पर केंद्रित रहा है, लेकिन अमेज़न क्षेत्र में फैले सैकड़ों अलग-अलग आदिवासी समुदायों को अब तक ACTO की संस्थागत संरचना में औपचारिक दर्जा प्राप्त नहीं था और उनकी भूमिका परामर्श तक सीमित रही।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सदस्य देश राष्ट्रीय आदिवासी संगठनों के माध्यम से आदिवासी प्रतिनिधियों को नामित करेगा। ये प्रतिनिधि ACTO बैठकों में भाग लेंगे, सिफारिशें करेंगे, तकनीकी चर्चाओं में योगदान देंगे और आदिवासी क्षेत्रों व पारिस्थितिक तंत्रों से जुड़ी प्राथमिकताओं पर सरकारों को सलाह देंगे। यह तंत्र ACTO की शासी संस्थाओं और कार्य समूहों के साथ समन्वय की प्रक्रियाएं भी निर्धारित करता है, ताकि आदिवासी दृष्टिकोणों को बाहरी सुझाव मानने के बजाय क्षेत्रीय रणनीतियों में एकीकृत किया जा सके।
अधिकारियों ने इस कदम को अमेज़न की रक्षा में आदिवासी समुदायों की केंद्रीय भूमिका की मान्यता बताया। अपेक्षाकृत सुरक्षित बचे वन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा आदिवासी इलाकों में आता है, और कई अध्ययनों में पाया गया है कि इन क्षेत्रों में आसपास की भूमि की तुलना में वनों की कटाई की दर कम है। आदिवासी नेताओं का लंबे समय से कहना रहा है कि जब भूमि अधिकारों और शासन प्रणालियों का सम्मान किया जाता है, तब संरक्षण प्रयास और जलवायु नीतियां अधिक प्रभावी होती हैं।
यह समझौता आदिवासी संगठनों द्वारा वर्षों की पैरवी के बाद हुआ, जिन्होंने ACTO से अपने शासन को आदिवासी अधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की मांग की थी। निर्णय से पहले हुई बैठकों में आदिवासी प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि निर्णय-प्रक्रिया से बाहर रखा जाना मानवाधिकारों और पर्यावरणीय परिणामों दोनों को कमजोर करता है, खासकर ऐसे समय में जब समुदाय अवैध खनन, लकड़ी कटाई, कृषि विस्तार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं।
आदिवासी तंत्र को मंजूरी देना बोगोटा में हुए ACTO के पांचवें राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन में अपनाई गई व्यापक प्रतिबद्धताओं का हिस्सा था। इस शिखर सम्मेलन में अमेज़न देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने वनों की कटाई कम करने, क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने और वन संरक्षण के लिए वित्त जुटाने के संकल्प दोहराए। जलवायु परिवर्तन और वन क्षरण से जुड़े बढ़ते जोखिमों के बीच इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आदिवासी भागीदारी को आवश्यक बताया गया।
ACTO अधिकारियों ने कहा कि यह नया तंत्र स्थायी और विकसित होने वाला होगा, जिसके आंतरिक नियम स्वयं आदिवासी प्रतिनिधियों द्वारा तय किए जाएंगे। इसकी संरचना में नियमित बैठकों, राष्ट्रीय सरकारों के साथ समन्वय और सीमाओं के पार आदिवासी समुदायों को प्रभावित करने वाले तात्कालिक मुद्दों को उठाने की व्यवस्था शामिल है।
आदिवासी नेताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसका महत्व इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। उन्होंने पर्याप्त संसाधनों, स्पष्ट अधिकार और आदिवासी भूमि को प्रभावित करने वाली सभी पहलों में स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। कुछ नेताओं ने यह भी चेतावनी दी कि भागीदारी को प्रतीकात्मक समावेशन के बजाय ठोस नीतिगत प्रभाव में बदलना होगा।
इस कदम को ACTO के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जो ऐसे समय में अधिक समावेशी क्षेत्रीय शासन की ओर बदलाव का संकेत देता है जब अमेज़न का भविष्य वैश्विक जलवायु स्थिरता से तेजी से जुड़ता जा रहा है। आदिवासी भागीदारी को औपचारिक रूप देकर, अमेज़न देश सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि वर्षावनों की दीर्घकालिक सुरक्षा उन लोगों पर निर्भर करती है जिन्होंने पीढ़ियों से यहां निवास किया है और इसका प्रबंधन किया है।
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