Home Asia नागपुर विश्विद्यालय में आदिवासी इतिहास संग्रहालय का शिलान्यास

नागपुर विश्विद्यालय में आदिवासी इतिहास संग्रहालय का शिलान्यास

विदर्भ की आदिवासी संस्कृति का होगा संरक्षण

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राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्विद्यालय में आदिवासी इतिहास संग्रहालय के शिलान्यास के अवसर पर कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर एवं अन्य अतिथी।

नागपुर (महाराष्ट्र, भारत): राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्विद्यालय में आदिवासी इतिहास संग्रहालय का शिलान्यास शनिवार को माननीय कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर के हाथों हुआ। यह संग्रहालय विश्वविद्यालय के महात्मा ज्योतिबा फुले शैक्षिक परिसर में बन रहा है।  इस संग्रहालय से विश्वविद्याल के माध्यम से विदर्भ की आदिवासी संस्कृति का संरक्षण किया जाएगा।

विश्वविद्यालय का यह शताब्दी वर्ष है। इसके चलते विश्वविद्यालय को महाराष्ट्र सरकार से १०० करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हुई थी। इस निधि से पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में यहा आदिवासी इतिहास संग्रहालय बनाया जा रहा है। कुल ४.४३ करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस संग्रहालय में आदिवासी समाज के इतिहास की जानकारी मिलेगी। विदर्भ में कुल आबादी के 23 प्रतिशत आदिवासी समुदाय के लोग हैं। इसमें मुख्य रूप से गोंड, कोलम, माडिया, मेलघाट के कोरकू आदि आदिवासी जनजातियाँ शामिल हैं। इस संग्रहालय के ज़रिए आदिवासी समुदायों के रीति-रिवाज़, परंपराएँ, संस्कृति और जीवन को दिखाया जाएगा। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के ज़रिए विदर्भ के आदिवासी समुदाय की संस्कृति को लोगों तक पहुँचाने का सम्माननीय काम करेगी।

विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इस अवसर पर डॉ. क्षीरसागर ने आदिवासी इतिहास संग्रहालय के निर्माणकार्य और जगह का निरीक्षण किया और संग्रहालय के बारे में पूरी जानकारी ली। कार्यक्रम का प्रास्ताविक मानवशास्त्र संकाय के डीन डॉ. शामराव कोरेटी ने किया। सूत्रसंचालन इतिहास विभाग के प्रो. रामभाऊ कोरेकर ने किया। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षिक विभागों से बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के समीप निर्माणाधीन संग्रहालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. क्षीरसागर, कुलसचिव डॉ. राजू हिवसे, वित्त एवं लेखा अधिकारी श्री. हरीश पालीवाल, वाणिज्य एवं व्यवस्थापन संकाय की डीन डॉ. मेधा कानेटकर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन डॉ. उमेश पालीकुंडवार, सीनेट सदस्य दिनेश शेरम, श्री प्रथमेश फुलेकर, पीएम-उषा समन्वयक डॉ. रूपेश बडेरे, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरतत्व विभाक के प्रमुख डॉ. प्रभास साहू, प्राणि विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. वंदना धुर्वे, आजीवन अध्ययन व विस्तार विभाग प्रमुख डॉ. समित माहोरे, विश्वविद्यालय अभियंता विनोद इल्मे, व्यवसाय प्रबंधन विभाग के प्रमुख डॉ. राहुल खराबे, बगीचा अधीक्षक प्रवीण गोटमारे, द्वारका कंस्ट्रक्शन के द्वारकाजी मेघनानी, लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता मिलिंद रायकवार और अन्य गणमान्य अतिथी उपस्थित थे।

पुरातत्व संग्रहालय का किया निरीक्षण

बाद में डॉ. क्षीरसागर ने प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग का भी दौरा किया और वहां के पुरातत्व संग्रहालय का निरीक्षण भी किया।

उन्होंने संग्रहालय में विदर्भ की ज़रूरी ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक विरासत की चीज़ों को संभालकर रखने के लिए विभाग की तारीफ़ की। इस मौके पर विभाक प्रसुख डॉ. साहू ने संग्रहालय में पुरातात्त्विक वस्तुओं के बारे में कुलपति को जानकारी दी।

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