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भारत के महाराष्ट्र में आदिवासी महिलाएं कर रहीं हैं आश्रमशालाओं का रखरखाव

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प्रातिनिधिक चित्र

मुंबई (महाराष्ट्र, भारत): एक अनूठी पहल में भारत के महाराष्ट्र में सरकार आदिवासी महिलाओं को राज्य के आश्रमशालाओं के रखरखाव का प्रशिक्षण दे रही है।

इस योजना का नाम “आदिसखी: वॉशमित्र” (WASHMITRA) रखा गया है, जिसे सितंबर २०२४ में यूनिसेफ के सहयोग से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत आदिवासी महिलाओं को आश्रमशालाओं के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल शामिल हैं। अब तक कुल १२० आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये महिलाएं अब राज्य की कई आश्रमशालाओं (आदिवासी छात्रों के लिए आवासीय विद्यालय) का रखरखाव संभाल रही हैं। यह उन्हें उद्यमिता और स्थायी आजीविका का अवसर प्रदान करता है। महिलाएं अब नियमित आय कमा रही हैं और वित्तीय रूप से स्वतंत्र बन रही हैं।

उनकी सेवाएं उनके क्षेत्रों में वॉश (WASH: water, sanitation and hygiene, यानी जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य-रक्षा) के ढांचे को भी मजबूत कर रही हैं। इस प्रकार, महिलाएं विद्यालय के ढांचे का रखरखाव करती हैं, जिसमें स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल सुविधाएं शामिल हैं। वे अपने समुदायों में कुशल नेतृत्वकर्ता भी बन चुकी हैं। यह पहल दिखाती है कि जो काम पारंपरिक रूप से पुरुषों के लिए माना जाता रहा है, वही काम उचित समर्थन मिलने पर महिलाएं भी प्रभावी ढंग से कर सकती हैं।

अब तक प्रशिक्षित १२० महिलाएं राज्य भर में २५६ विद्यालयों का रखरखाव कर रही हैं, जबकि सरकार ने उनकी सेवाओं का विस्तार ५०० विद्यालयों तक करने का लक्ष्य रखा है।

“आदिसखी” का अर्थ है “आदिवासियों की मित्र”। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने समय पर मरम्मत कर, ठेकेदारों पर निर्भरता कम कर और आवासीय विद्यालयों में समस्याओं के तेज समाधान के माध्यम से वॉश सिस्टम में सुधार किया है।

यह परियोजना इन महिलाओं को नियमित आय प्रदान करती है और विद्यालयों के ढांचे को भी सुधारने में मदद करती है। यह परियोजना महाराष्ट्र सरकार के आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से और यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल शैक्षिक कोष) के सहयोग से लागू की जा रही है। विभाग राज्य में लगभग ५०० आवासीय विद्यालय चलाता है, जहां २,००,००० से अधिक बच्चों को शिक्षा मिलती है।

यह परियोजना इसलिए शुरू की गई क्योंकि आदिवासी क्षेत्रों में मरम्मत कार्य करवाना मुश्किल था। अधिकारियों ने महिलाओं को प्रशिक्षण देने का विचार किया, जो न केवल समस्या का समाधान करेगा बल्कि उन्हें सशक्त बनाएगा और उन्हें जीविका कमाने में मदद करेगा। महिलाओं को नागपुर, अमरावती, नासिक और ठाणे में प्रशिक्षण दिया गया है।

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