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जनजाति को भूमि पर अधिक नियंत्रण देने वाले दो बिलों को ट्रंप ने रोका

बिल पहले कांग्रेस से व्यापक समर्थन के साथ पारित हुए थे; कदम की हो रही आलोचना

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प्रातिनिधिक चित्र

वॉशिंगटन (संयुक्त राज्य अमेरिका): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सर्वदलीय कानून रोक दिया है, जो फ्लोरिडा राज्य की मिककोसुकी जनजाति को उनके पूर्वजों की एवरग्लेड्स भूमि के एक हिस्से पर अधिक अधिकार देने वाला था। ट्रंप के इस वीटो से मूलनिवासी अमेरिकियों की संप्रभुता को बड़ा झटका लगा है।  श्री ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वीटो का उपयोग करने का यह पहला अवसर है। उनके इस कदम की आदिवासी नेताओं और सांसदों ने कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने कहा कि यह जनजातीय संप्रभुता और पर्यावरणीय संरक्षण को कमजोर करता है।

पिछले सप्ताह ट्रंप ने दो बिलों को अस्वीकार कर दिया जिनमें मिककोसुकी रिज़र्व्ड एरिया एमेंडमेंट्स एक्ट शामिल था। यह बिल ओस्सिओला कैंप क्षेत्र को एवरग्लेड्स नेशनल पार्क में जनजाति की आरक्षित भूमि में शामिल करता और बाढ़ से प्रभावित अवसंरचना के लिए संघीय सुरक्षा सुनिश्चित करता। जनजातीय अधिकारी और कांग्रेस के सदस्य इसे भूमि स्थिति स्पष्ट करने और पीढ़ियों से वहां रहने वाले समुदाय की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण बढ़ाने का प्रयास मानते थे।

ट्रंप ने कहा कि जनजातीय भूमि अधिकारों का यह प्रस्ताव उनके व्यापक नीति एजेंडे के विपरीत है। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह प्रावधान उन लोगों को लाभ पहुंचाएगा जिन्होंने “यथोचित आप्रवासन नीतियों में बाधा डाली,” जिसका संदर्भ मिककोसुकी जनजाति के उस मुकदमे से है जिसके तहत उन्होंने एवरग्लेड्स में “एलिगेटर अलकाट्राज” नामक आप्रवासन हिरासत केन्द्र का विरोध किया था। जनजातीय नेताओं का कहना है कि यह सुविधा संवेदनशील जलभूमि, शिकार और सांस्कृतिक समारोह जैसी प्रथाओं, तथा उनके निवास क्षेत्र की पारिस्थितिक अखंडता के लिए खतरा थी।

जनजाति ने वीटो पर निराशा और विरोध व्यक्त किया। मिककोसुकी जनजाति के प्रमुख टालबर्ट सायप्रस ने कहा कि यह विधेयक मूलतः पर्यावरण संरक्षण, लंबे समय से मान्यता प्राप्त जनजातीय हितों का सम्मान और घरों व सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा के लिए था, किसी विशेष लाभ के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक ओस्सिओला कैंप क्षेत्र बाढ़ के जोखिम में है और यह कानून कई वर्षों के दो-पक्षीय प्रयास का परिणाम था ताकि जनजाति के सदस्यों के लिए बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। सायप्रस ने यह भी कहा कि संघीय कार्रवाइयों के खिलाफ जनजाति की कानूनी चुनौतियाँ आप्रवासन नीति के विरोध के बराबर नहीं हैं और एवरग्लेड्स पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय भूमि की रक्षा संवैधानिक कर्तव्य है।

इस वीटो ने जनजातीय संप्रभुता और संघीय संबंधों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। बिल के समर्थकों का कहना है कि यह लंबे समय से जनजातियों और भूमि के संबंध को मान्यता देता और बाढ़ व पर्यावरणीय गिरावट से निपटने के लिए स्पष्ट और कानूनी आधार प्रदान करता। बिल को दोनों सदनों में आम सहमति से पारित किया गया था।

वीटो के आलोचक कहते हैं कि यह कदम संघीय निर्णयों में जनजातीय चिंताओं को सही तरीके से परखने के लिए गलत उदाहरण पेश करता है। वे कहते हैं कि विशेष रूप से एवरग्लेड्स जैसे पारिस्थितिक तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच, जनजातीय ज्ञान और संरक्षण नीति निर्माण में केंद्रीय होना चाहिए। कुछ सांसदों का कहना है कि यह वीटो राजनीतिक रूप से प्रेरित था, कानून की सामग्री पर चिंता के कारण नहीं।

राष्ट्रपति ने कोलोराडो में काफी समय से लंबित जल पाइपलाइन परियोजना को सुविधाजनक बनाने वाले एक अलग बिल को भी वीटो किया। दोनों मामलों में राष्ट्रपति के वीटो को कांग्रेस दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर रद्द कर सकती है, लेकिन इसके लिए मजबूत दो-पक्षीय समर्थन की आवश्यकता होगी।

मिककोसुकी जनजाति के लिए यह वीटो केवल एक विधायी झटका नहीं है; यह भूमि अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों की संघीय नीति निर्माण में भागीदारी की निरंतर चुनौतियों को उजागर करता है। जनजाति ने संकेत दिया है कि वह अपनी भूमि की रक्षा और जनजातीय अधिकार बनाए रखने के लिए कानूनी और राजनीतिक उपाय जारी रखेगी।

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