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वर्जीनिया में शिक्षा और संप्रभुता सुधारों के लिए पहल

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प्रातिनिधिक चित्र

रिचमंड (वर्जीनिया, संयुक्त राज्य अमेरिका): संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्जीनिया में विधायक और कई मूल अमेरिकी जनजातियों के प्रतिनिधियों ने विधानमंड के मौजूदा सत्र कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं जिनका उद्देश्य बीसवीं सदी के शुरुआती दौर की भेदभावपूर्ण नीतियों में निहित लंबे समय से चले आ रहे अन्यायों का सामना करना है। इन उपायों का मकसद दशकों के हाशियाकरण और कानूनी बहिष्कार के बाद शैक्षणिक बाधाओं को हटाना और जनजातीय संप्रभुता को मजबूत करना है।

यह प्रयास १९२४ के रेशियल इंटेग्रिटी एक्ट के प्रभावों को दूर करने के लिए है। यह एक कानून था जिसके तहत कठोर नस्लीय वर्गीकरण लागू किया गया तथा बीसवीं सदी के अधिकांश समय तक आधिकारिक अभिलेखों से मूल अमेरिकी पहचान को लगभग मिटा ही दिया। इससे मूलनिवासियों का शिक्षा और कानूनी अधिकारों तक पहुंच पाना असंभव हो गया।

जनजातीय नेताओं और विधायकों ने कहा कि इस अधिनियम की सख्त परिभाषाओं के तहत मूलनिवासी बच्चों को अक्सर छोटी कक्षाओं से आगे स्कूलों में पढ़ने से रोका गया, जिससे कई परिवारों को वर्जीनिया के बाहर शिक्षा की तलाश करनी पड़ी। इस कानून के कारण जनजातियों के लिए वंशावली का दस्तावेजीकरण करने, पहचान स्थापित करने और शैक्षणिक व सांस्कृतिक पहलों को आगे बढ़ाने के प्रयासों को जटिल बना दिया है। इस अधिनियम को १९६७ में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था, लेकिन इसका प्रभाव अब भी जनजातीय समुदायों में महसूस किया जाता है।

अब ऐसे कानून लाने का प्रस्ताव है जिनके तहत केंद्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जनजातियों के सदस्य छात्रों को निवास की परवाह किए बिना राज्य में ही शिक्षा पाने के लिए पात्र बनाया जाएगा, जो मूलनिवासी छात्रों के लिए शैक्षणिक पहुंच बढ़ाने और वित्तीय बाधाओं को कम करने का प्रयास है। साथ ही साथ राज्य के नियमों में संशोधन भी होगा ताकि भेदभावपूर्ण वर्गीकरण के अवशेष हटाए जा सकें और पाठ्यक्रम में जनजातीय इतिहास और संस्कृतियों को पर्याप्त स्थान मिले। इसके अलावा वर्जीनिया और उसकी जनजातीय राष्ट्रों के बीच संबंधों को स्पष्ट और पुष्ट करने के लिए भी कानून लाया जा रहा है।

माना जाता है कि ये सुधार बहुत समय से लंबित थे और आदिवासी समुदायों के अधिकारों और गरिमा को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। वर्जीनिया में मान्यता प्राप्त जनजातियाँ में नैनसेमंड और अन्य शामिल हैं जिन्हें २०१८ के थॉमसिना ई जॉर्डन इंडियन ट्राइब्स ऑफ वर्जीनिया फेडरल रिकग्निशन एक्ट के तहत मान्यता मिली थी। यह जनजातियाँ वर्षों से बुनियादी ढांचे के निर्माण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आर्थिक अवसरों में सुधार के लिए काम कर रही हैं।

प्रस्तावित कानून की, विशेष रूप से शिक्षा संबंधी कानून की, आलोचना भी हो रही है। इस बात पर सवाल उठ रहें हैं कि विस्तारित जनजातीय अधिकार मौजूदा राज्य अधिकार क्षेत्रों के साथ कैसे तालमेल बिठाएंगे। इन बदलावोें के समर्थकों का कहना है कि ऐतिहासिक गलतियों को सुधारना और मूलनिवासियों के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देना प्रणालीगत भेदभाव को दूर करने के राज्य के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है।

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