मनीला (फिलीपीन्स): एशिया भर के आदिवासी लोग नवीकरणीय ऊर्जा विकास के तेजी से विस्तार के चलते मूलनिवासियों के भूमि अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। फिलीपीन्स, भारत और इंडोनेशिया में रहनेवाले आदिवासी समुदायों का कहना है कि पवन फार्म, सौर पार्क, बांध और अन्य तथाकथित हरित परियोजनाओं के लिए दबाव उनके पूर्वजों की भूमि और मौलिक अधिकारों पर गाज़ गिर रही है। जलवायु संकट के समाधान के रूप में जिस बात को बढ़ावा दिया जा रहा है, दरअसल उसके कारण भूमि हड़पने, पर्यावरणीय नुकसान, जबरन विस्थापन हो रहा है और आदिवासी क्षेत्रों में सैनिकीकरण बढ़ रहा है।
फिलीपीन्स के कलींगा प्रांत में यह स्थिति व्यापक प्रवृत्ति का प्रतीक बन गई है। पिछले साल के अंत में पुलिस ने फिलीपीन्स के पिनुकपुक में आदिवासी कार्यकर्ता एल्मा आविंगन-तुआज़ोन के घर में जबरन घुस गए, जिससे उनका परिवार घबरा गया। आविंगन-तुआज़ोन लंबे समय से उन बांधों और खनन परियोजनाओं का विरोध करती रही हैं जो उनके पूर्वजों की भूमि और आजीविका पर बुरा असर कर रहे हैं।
आदिवासी नेताओं का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा की कई परियोजनाएं संबंधित समुदायों से वास्तविक स्वतंत्र, पूर्व और सूचना प्राप्त सहमति के बिना आगे बढ़ती हैं। इस प्रकार की सहमति आदिवासी आत्मनिर्णय पर अंतरराष्ट्रीय मानकों में निहित एक अधिकार है। उनका कहना है कि स्वतंत्र, पूर्व और सूचना प्राप्त सहमति को केवल एक औपचारिकता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक बुनियादी अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए जो समुदायों को यह तय करने की अनुमति देता है कि उनकी भूमि पर कौन सी परियोजनाएं प्रवेश करें। सरकारें और कंपनियां इन परियोजनाओं को सीमित परामर्श के साथ बढ़ावा दे रही हैं, जिससे आदिवासी अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है और पूर्वजों की भूमि पर उनका नियंत्रण कमजोर हो रहा है।
कई आदिवासी समूहों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा भूमि में बड़े परिवर्तन करता है, जिससे मृदा अपरदन, भूमि क्षरण और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता होती है।
यह प्रवृत्ति केवल फिलीपीन्स तक सीमित नहीं है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम में आदिवासी और जनजातीय समुदायों ने एक बड़े सौर ऊर्जा परियोजना का सफलतापूर्वक विरोध किया, जो हजारों हेक्टेयर आदिवासी भूमि को बिना पर्याप्त परामर्श के हड़पने वाली थी। निरंतर विरोध प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप उस परियोजना को रोक दिया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बिना सहमति के विकास का विरोध करने में समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप में भी मूलनिवासियों ने एक भूतापीय परियोजना का विरोध किया, क्योंकि उन्होंने भूमि अधिकारों, स्वास्थ्य जोखिमों और आजीविका की हानि को लेकर चिंता जताई थी। इस परियोजना को समुदाय के विरोध के बाद रोक दिया गया।
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