फीनिक्स (एरिज़ोना, संयुक्त राज्य अमेरिका): अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन ने २०२६ जनगणना परीक्षण के लिए क्षेत्रीय परीक्षण स्थलों की संख्या में अचानक कटौती की है। पहले घोषित छह स्थानों में से चार, जिनमें एरिज़ोना के आदिवासी क्षेत्र शामिल थे, हटा दिए गए हैं, जिससे २०३० की दशकवार जनगणना की तैयारी की पर्याप्तता को लेकर जनगणना विशेषज्ञों और आदिवासी नेताओं में चिंता पैदा हो गई है। इस कटौती के बाद परीक्षण का ध्यान लगभग पूरी तरह से दक्षिण अमेरिका के दो शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित हो गया है। इससे आलोचना की जा रही है कि ऐतिहासिक रूप से कम गिने गई समुदायों का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया जाएगा।
सन २०२६ में होनेवाले जनगणना के परीक्षण के लिए विभिन्न स्थानों को शामिल किया गया था ताकि नए तरीकों का परीक्षण किया जा सके जिन्हें अमेरिकी जनगणना ब्यूरो अगले दशक में लागू करने का इरादा रखता है। इन स्थलों को कम स्वयं-प्रतिक्रिया दर, ग्रामीण अलगाव, सीमित इंटरनेट पहुँच, पत्राचार करने अयोग्य पतों की बड़ी संख्या और २०२० में कम गिनी गई आबादी, जिनमें आदिवासी आरक्षण शामिल थे, जैसी विशेषताओं के आधार पर चुना गया था। इन क्षेत्रों में कोलोराडो स्प्रिंग्स (कोलोराडो); एरिज़ोना के आदिवासी क्षेत्र जिनमें फोर्ट एपाचे और सैन कार्लोस आरक्षण शामिल हैं; पश्चिमी नॉर्थ कैरोलिना जिसमें क्वाला बाउंडरी शामिल है; और पश्चिमी टेक्सास के ग्रामीण काउंटी शामिल थे। कटौती के बाद शेष दो स्थल हैं हंट्सविले (अलाबामा) और स्पार्टनबर्ग (साउथ कैरोलिना)। दोनों ही महानगरीय क्षेत्र हैं।
परिवर्तनों को वाणिज्य विभाग द्वारा जारी एक नोटिस में सूचित किया गया। वाणिज्य विभाग जनगणना ब्यूरो की निगरानी करता है। जनगणना अधिकारी कहते हैं कि एजेंसी अभी भी २०३० की जनगणना के लिए “अब तक की सबसे सटीक गिनती” करना चाहती है और स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर साझेदारी को महत्व देती है। हालांकि जनगणना ब्यूरो ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि परीक्षण के दायरे को क्यों घटाया गया है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सीमित परीक्षण उन प्रयासों में बाधा डाल सकता है जो ऐसी आबादी तक पहुंचने के लिए जनगणना विधियों को अनुकूलित करने के लिए आवश्यक हैं। आदिवासी और मूलनिवासी आबादी ऐसे क्षेत्रों में हैं जहाँ गिनती करना कठिन होता है। उनका कहना है कि इससे अलग-थलग आदिवासी क्षेत्रों, सीमित कनेक्टिविटी वाले ग्रामीण क्षेत्रों और लगातार कम प्रतिक्रिया दर वाले क्षेत्रों की स्थितियों की समझने में दिक्कत पैदा होगी।
दस वर्षों में एक बार होनेवाली जनगणना के आधार पर ही कांग्रेस की सीटों और इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों के आवंटन निर्धारण होता है। इसके अलावा इसके आधार पर तकरीबन ३ लाख करोड़ डॉलर के केंद्रीय निधि के वितरण के बारे में भी निर्णय लिए जाते हैं। सन २०२० की जनगणना में कम गिनती का प्रभाव रंग समुदायों, निम्न-आय आबादी और मूलनिवासी क्षेत्रों पर असमान रूप से पड़ा।
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