Home Asia भारत में ग्रेट निकोबार परियोजना आदिवासी भूमि पर चिंताओं के बावजूद मंजूर

भारत में ग्रेट निकोबार परियोजना आदिवासी भूमि पर चिंताओं के बावजूद मंजूर

राष्ट्रीय पर्यावरणीय न्यायाधिकरण ने ८०,००० करोड़ रुपये की परियोजना को रोकने से इनकार किया, कहा कि कोई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारण नहीं है

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प्रातिनिधिक चित्र

कोलकाता (पश्चिम बंगाल, भारत): भारत के राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने विवादित ८०,००० करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार परियोजना को मंजूरी दे दी है। न्यायाधिकरण ने अपने निर्णय में कहा कि इसे रोकने के लिेए कोई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारण नहीं है।

यह निर्णय सोमवार को आया। इस परियोजना पर पर्यावरणविदों और आदिवासी समूहों द्वारा आपत्ति उठाई गई है। परियोजना का विरोध इस लिए हो रहा है कि इससे क्षेत्र के पर्यावरण और मूलनिवासी आदिवासी समुदायों के आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

परियोजना ग्रेट निकोबार द्वीप पर १६६.१० वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर प्रस्तावित है। इसमें से १३०.७५ वर्ग किलोमीटर वन भूमि है और ८४.१० वर्ग किलोमीटर आदिवासी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह परियोजना स्थानीय आदिवासी समुदायों को विस्थापित करने की संभावनाओं के कारण सुर्खियों में रही है।

कुल ८०,००० करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य द्वीप को एक वैश्विक व्यापार केंद्र में बदलना है। योजना में एक पारगमन टर्मिनल, एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक बिजलीघर और एक आवासीय कॉलोनी शामिल हैं। परियोजना के समर्थक तर्क देते हैं कि यह भारत की रणनीतिक महत्ता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र की जैव विविधता के लिए खतरा है और आदिवासी समुदायों की पारंपरिक भूमि पर अतिक्रमण करती है। ये आदिवासी अपने आजीविका के लिए द्वीप के घने जंगलों और तटीय क्षेत्रों पर निर्भर हैं, जिसमें शिकार करना और  मछली पकड़ना शामिल है। परियोजना से आदिवासी समूहों की पारंपरिक जीवन शैली प्रभावित होने का डर है। उनकी भूमि के अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच उनके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं, और कई आदिवासी नेताओं ने अधिक समावेशी परामर्श प्रक्रिया की मांग की है।

न्यायाधिकरण का यह निर्णय पर्यावरण समूहों और आदिवासी अधिकार संगठनों द्वारा दायर अपील के बाद आया, जिसमें परियोजना को रोकने की मांग की गई थी। अपील में यह तर्क दिया गया था कि यह पर्यावरणीय कानूनों और आदिवासी अधिकारों का संभावित उल्लंघन है। न्यायाधिकरण ने कहा कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा दी गई पर्यावरण मंजूरी पर पर्याप्त विचार किया गया है, और इसे रोकने के लिए कोई ठोस आधार नहीं पाया गया। न्यायाधिकरण ने यह भी उल्लेख किया कि परियोजना को इसके पर्यावरणीय प्रभाव की गहन जांच के बाद मंजूरी दी गई है, जिसमें क्षेत्र के वनस्पति और जीव-जंतुओं का मूल्यांकन शामिल था।

वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता आशिष कोठारी ने परियोजना के खिलाफ NGT में दो याचिकाएँ दायर की थीं। याचिकाकर्ता ने कहा कि बंदरगाह के लिए ५७ हेक्टेयर, हवाई अड्डे के लिए ६० हेक्टेयर, एक रक्षा टाउनशिप के लिए ८१ हेक्टेयर और सामान्य टाउनशिप क्षेत्र के ५०३ हेक्टेयर ऐसे द्वीप तटीय नियमन क्षेत्र (ICRZ) में आते हैं। इस नियमन के अंतर्गत द्वीप पर विकस पर प्रतिबंधित है।

अंडमान और निकोबार द्वीप भारत का हिस्सा हैं, जो बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं। यह चेन्नई (तमिलनाडु, भारत) से लगभग १,२०० किलोमीटर और कोलकाता (पश्चिम बंगाल, भारत) से लगभग १,३०० किलोमीटर दूर हैं।

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