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भारत की समृद्ध जनजातीय धरोहर का उत्सव मनाने के लिए मार्च में नई दिल्ली में कई कार्यक्रम

अंतरराष्ट्रीय मंडप में ऑस्ट्रेलिया, फिजी और वियतनाम के आदिवासी शिल्पकारों दिखाएंगे अपना हुनर

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भारत के जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने शनिवार को नई दिल्ली में आदिवासी कला महोत्सव के लोगो का अनावरण किया।

नई दिल्ली (भारत): भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय २ मार्च से २४ मार्च, २०२६ तक देशभर के जनजातीय समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव मनाने के लिए कई कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करेगा।

शनिवार को यहां आयोजित एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने कहा कि पाँच कार्यक्रमों की यह श्रृंखला न केवल जनजातीय धरोहर का उत्सव मनाएगी बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण और आदिवासी कला रूपों को व्यापक राष्ट्रीय पहचान दिलाने के अवसर भी प्रदान करेगी। ये पाँच कार्यक्रम हैं आदिवासी कला महोत्सव, आदिवासी संगीत महोत्सव, भारत जनजातीय महोत्सव, आदिवासी व्यापार संमेलन और सीएसआर संमेलन। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य जनजातीय लोगों को अपनी कौशल, रचनात्मकता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। ओराम ने औपचारिक रूप से आदिवासी कला महोत्सव, भारत जनजातीय महोत्सव और आदिवासी संगीत महोत्सव लोगो का अनावरण किया।

इस अवसर पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, जनजातीय कार्य सचिव रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडे और ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक एम. राजा मुरुगन भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम इस प्रकार होंगे –

आदिवासी कला महोत्सव (ट्राइबल आर्ट्स फेस्टिवल)

आदिवासी कला महोत्सव का आयोजन २ मार्च से १३ मार्च, २०२६ तक नई दिल्ली के त्रावणकोर पैलेस में किया जाएगा। इसमें ७० से अधिक प्रतिष्ठित जनजातीय कलाकार भाग लेंगे और देशभर की ३० विशिष्ट जनजातीय कला विधाओं की लगभग १,००० कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। भारत की जनजातीय दृश्य परंपराओं के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित, टीएएफ में वॉकथ्रू, लाइव पेंटिंग प्रदर्शन, चित्रित व्याख्यान, मेंटरशिप कार्यशालाएँ, सहभागिता सत्र और कलाकारों, क्यूरेटरों, डिजाइनरों तथा संग्राहकों को एक साथ लाने वाली पैनल चर्चाएँ शामिल होंगी। इसका उद्देश्य जनजातीय कला को भारत की सृजनात्मक अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में स्थापित करते हुए दृश्यता, गरिमा और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है।

आदिवासी संगीत महोत्सव (लिविंग रूट्स फेस्टिवल)

लिविंग रूट्स फेस्टिवल – द साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया का आयोजन १३ मार्च से १५ मार्च, २०२६ तक दो स्थलों – बीकानेर हाउस और इंडिया गेट – पर किया जाएगा। बीकानेर हाउस में दोपहर १.३० बजे से शाम ५ बजे तक आयोजित खंड में भाषण, प्रस्तुतियाँ, संरक्षण और नवाचार पर पैनल चर्चाएँ तथा बौद्धिक संपदा अधिकार, स्वामित्व और नैतिक सहयोग पर सत्र शामिल होंगे। इंडिया गेट में शाम ५ बजे से रात ९.१५ बजे तक आयोजित खंड में विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाली १५ प्रस्तुतियाँ होंगी।

भारत जनजातीय महोत्सव (भारत ट्राइब्स फेस्ट)

भारत ट्राइब्स फेस्ट का आयोजन १८ मार्च से ३० मार्च, २०२६ तक नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में किया जाएगा। यह एक राष्ट्रीय बाज़ार और सांस्कृतिक मंच होगा, जिसमें १,००० से अधिक जनजातीय शिल्पकार, वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके), जनजातीय शेफ और सांस्कृतिक दल भाग लेंगे, जो २०० से अधिक स्टॉलों पर कला, शिल्प और व्यंजन प्रस्तुत करेंगे। मुख्य आकर्षणों में उच्च-स्तरीय जनजातीय उत्पादों वाला सिग्नेचर पवेलियन और मंत्रालय के “रीसा” ब्रांड का शुभारंभ शामिल है, जिसका उद्देश्य जनजातीय फैशन और शिल्प को प्रीमियम और वैश्विक बाज़ारों में स्थापित करना है। एक अंतरराष्ट्रीय पवेलियन ऑस्ट्रेलिया, फिजी और वियतनाम जैसे देशों के आदिवासी शिल्पकारों की मेजबानी करेगा, जिससे वैश्विक जनजातीय समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। एक ट्राइबल फूड कोर्ट भी होगा, जिसमें २१ राज्यों के व्यंजन, लाइव प्रदर्शन और शाम के समय विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी।

आदिवासी व्यापार संमेलन (ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव)

ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव का आयोजन भारत ट्राइब्स फेस्ट के साथ किया जाएगा। यह १४ दिवसीय कॉन्क्लेव जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और जनजातीय उद्यमों को घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए संरचित होगा। कॉन्क्लेव में वन-आधारित खाद्य मूल्य श्रृंखलाएँ, सतत वस्त्र और हस्तशिल्प, नैतिक लक्ज़री पोजिशनिंग, नवाचार और प्रौद्योगिकी एकीकरण, कौशल विकास और रोजगार मार्ग, बौद्धिक संपदा संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान के नैतिक व्यावसायीकरण तथा समुदाय-नेतृत्व वाले पर्यटन मॉडल जैसे विषयों पर सत्र होंगे। इससे खरीदार-विक्रेता संपर्कों को सुगम बनाने, साझेदारियों को प्रोत्साहित करने और जनजातीय आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु व्यावहारिक सिफारिशें उत्पन्न होने की अपेक्षा है।

सीएसआर संमेलन

२४ मार्च, २०२६ को नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में एक दिवसीय राष्ट्रीय सीएसआर समिट आयोजित किया जाएगा। इसमें कॉर्पोरेट नेता, सीएसआर प्रमुख, क्रियान्वयन भागीदार और राज्य जनजातीय कल्याण विभाग एक साथ आएंगे। समिट का उद्देश्य सीएसआर समर्थन की आवश्यकता वाले प्राथमिकता क्षेत्रों को प्रस्तुत करना, जनजातीय विकास में योगदान देने वाले कॉर्पोरेट भागीदारों को मान्यता देना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संरचित सहयोग को सुगम बनाना है। वर्तमान में सीएसआर-वित्तपोषित पहलों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा डिजिटल शिक्षा, बालिका छात्रों के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता हस्तक्षेप तथा अनेक राज्यों में क्षमता विकास कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण निवेश शामिल हैं।

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