Home Asia आदिवासी प्रमुख चेम्बन कोलुम्बन की पोती का भूमि पट्टा रद्द

आदिवासी प्रमुख चेम्बन कोलुम्बन की पोती का भूमि पट्टा रद्द

बिना सूचना के पट्टा रद्द किया गया, आदिवासी नायक के परिवार का आरोप

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चेम्बन कोलुम्बन

इडुक्की (केरल, भारत): सन 2020 में प्रसिद्ध आदिवासी नायक चेम्बन कोलुम्बन की पोती को दिया गया भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (पट्टा) अब अधिकारियों द्वारा रद्द कर दिया गया है। परिवार ने कहा कि कोई सूचना दिए बिना ही पट्टा रद्द कर दिया गया।

कोलुम्बन की पोती और थेनन भास्करन की बेटी सुधा राजप्पन को दो साल पहले वाज़ाथोपे के पास 60 सेंट्स पुश्तैनी भूमि के लिए पट्टा मिला था, लेकिन हाल ही में उन्हें अनौपचारिक रूप से सूचित किया गया कि यह रद्द कर दिया गया है।

राजप्पन और उनका परिवार का कहना है कि उन्हें रद्दीकरण का कोई औपचारिक नोटिस या आधिकारिक व्याख्या नहीं दी गई। परिवार का दावा है कि पट्टा रद्द किए जाने का कारण यह बताया गया कि भूमि के बीच से एक सार्वजनिक रास्ता गुजर रहा है, लेकिन इस बात को परिवार नकारता है। उनका कहना है कि पट्टे से जुड़ी आधिकारिक भूमि स्केच में केवल एक सार्वजनिक सड़क को भूमि से सटा हुआ दिखाया गया है और कोई रास्ता भूमि के अंदर से नहीं जाता।

उन्होंने कहा कि लोग कई सालों से भूमि के एक किनारे से गुजरते रहे हैं, वो भी परिवार की सहमति से, और इसे कभी भी सार्वजनिक मार्ग के तौर पर औपचारिक रूप से मान्यता नहीं मिली। सन 2022 में वाज़ाथोपे ग्राम पंचायत के अधिकारियों ने बिना सहमति लिए भूमि से होकर एक सड़क बनाने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने इसका विरोध किया और काम को रुकवा दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि उस समय उन्हें चेतावनी दी गई थी कि यदि भूमि नहीं दी गई तो पट्टा रद्द कर दिया जाएगा।

विवाद इस साल फिर से उठ खड़ा हुआ जब पंचायत परिषद में नई कार्यकारिणी ने कार्यभार संभाला। सुधा राजप्पन के किसी भी हिस्से को रास्ते के लिए देने से इनकार करने के बावजूद निर्माण सामग्री साइट पर लाई गई और बिना परिवार की अनुमति के काम शुरू कर दिया गया। तब जाकर परिवार को पट्टे के रद्द होने की जानकारी मिली। परिवार कहना है कि उन्हें रद्दीकरण आदेश की प्रति या अधिकारियों से कोई विस्तृत कारण नहीं मिली।

यह मामला चेम्बन कोलुम्बन की विरासत के कारण ध्यान आकर्षित कर रहा है। चेम्बन ऊराली समुदाय के एक आदिवासी नेता थे। उनका स्थानीय भूभाग का ज्ञान लगभग 104 साल पहले इडुक्की डेम के स्थल की पहचान करने में सहायक बना था। सन 1922 में कोलुम्बन ने यूरोपीय इंजीनियरों को एक संकीर्ण वन मार्ग से मार्गदर्शन किया, जो कुरावन और कुराठी पहाड़ियों के बीच घाटी में था। बाद में यहीं बांध का निर्माण हुआ। उनका योगदान इसकी प्रारंभिक योजना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य सरकार ने एक मूर्ति और स्मारक स्थापित किये हैं।

केरल में आदिवासी भूमि अधिकार लंबे समय से एक विवादास्पद मुद्दा रहे हैं, जहां आदिवासी समुदायों को विकास के दबाव और प्रशासनिक निर्णयों के बीच अपनी पुश्तैनी भूमि का स्वामित्व बनाए रखने में अक्सर कठिनाई होती है। भूमि पट्टे कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, और ऐसे पट्टों का रद्द होना परिवारों को असुरक्षित बना सकता है, जब तक कि उचित प्रक्रिया का पालन न किया जाए।

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