Home Asia “शिक्षा के माध्यम से प्रगति करें लेकिन जड़ों से जुड़े रहें”

“शिक्षा के माध्यम से प्रगति करें लेकिन जड़ों से जुड़े रहें”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी समुदायों से कहा

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को दार्जिलिंग में ९वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन में।

दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल, भारत): भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के आदिवासी समुदाय से शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति को अपनाने का आग्रह किया है, साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक मूल्यों से दृढ़ता से जुड़े रहने पर जोर दिया है।

शनिवार को दार्जिलिंग में ९वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीमती मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदायों को मजबूत बनाने और उन्हें देश की विकास प्रक्रिया में अधिक प्रभावी रूप से भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा और ज्ञान आदिवासी लोगों को बाधाओं को पार करने और अपने समुदायों की प्रगति में योगदान देने में मदद कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने उन आदिवासी परंपराओं, भाषाओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के महत्व पर बल दिया जो आदिवासी पहचान की नींव हैं।

श्रीमती मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदायों के पास समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गहन ज्ञान प्रणालियाँ हैं, जो पीढ़ियों से प्रकृति और अपने पर्यावरण के साथ उनके निकट संबंध के माध्यम से विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस विरासत पर गर्व करना चाहिए। युवाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आधुनिकीकरण और विकास इन पारंपरिक मूल्यों के क्षरण का कारण न बनें। उन्होंने कहा कि शिक्षा, आधुनिक कौशल और सांस्कृतिक संरक्षण का संतुलित दृष्टिकोण आदिवासी समुदायों को उनकी विशिष्ट पहचान बनाए रखते हुए सशक्त बना सकता है। राष्ट्रपति ने आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले शिक्षित युवाओं को अपने गांवों के कल्याण के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।

श्रीमती मुर्मू ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय विकास में आदिवासी समुदायों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि मूलनिवासी समाज लंबे समय से टिकाऊ जीवन शैली और मजबूत सामुदायिक मूल्यों का प्रदर्शन करते रहे हैं, जो समाज के लिए उदाहरण बन सकते हैं। आर्थिक प्रगति के साथ इन परंपराओं की रक्षा करना समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष २००३ संताल समुदाय के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उसी वर्ष संथाली भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। पिछले वर्ष ओल चिकी लिपि में संथाली भाषा में लिखित भारत का संविधान प्रकाशित हुआ।

भारत में ७०० से अधिक मान्यता प्राप्त आदिवासी समूह हैं, जो देश की जनसंख्या का ८ प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं। श्रीमती मुर्मू भारत की पहिली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।

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