डूंगरपुर (राजस्थान, भारत): भारत के राज्य राजस्थान की सरकार ने आदिवासी-प्रभुत्व वाले जिलों के लिए कुल ३२६ परियोजनाओं के शुभारंभ की घोषणा की है, जिनकी कुल लागत १,९०२ करोड़ रुपये है। इसके अलावा राज्य में मूलनिवासी समुदायों को वन अधिकार प्रदान करने के एक बड़ा अभियान भी चलाया जाएगा।
इन परियोजनाओं का शुभारंभ इस सप्ताह की शुरुआत में राजस्थान के डूंगरपुर जिले के नवटापरा गांव के पास बेणेश्वर धाम में आयोजित आदिवासी गौरव दिवस के अवसर पर एक समारोह में किया गया। ये परियोजनाएँ राज्य के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर और सिरोही जिलों में चलाई जाएंगी। इन में बुनियादी ढांचे, आजीविका और सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह योजना आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक परिस्थितियों में सुधार की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
इसके अलावा एक राज्यव्यापी अभियान भी चलाया जाएगा जिसके तहत वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार पट्टे प्रदान किए जाएंगे। इन पट्टों को औपचारिक रूप से राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा, जिससे लाभार्थियों को सरकारी कल्याण योजनाओं, संस्थागत ऋण और अन्य अधिकारों तक पहुंच मिल सकेगी, जिनके लिए अक्सर भूमि स्वामित्व दस्तावेज की आवश्यकता होती है।
यह कदम २००६ के वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन में लंबे समय से मौजूद अंतराल को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसे ऐतिहासिक रूप से वन-निवासी समुदायों के भूमि और संसाधन अधिकारों को मान्यता देने के लिए लागू किया गया था, जिन्हें औपनिवेशिक और स्वतंत्रता-उपरांत वन कानूनों के तहत कानूनी स्वामित्व से वंचित रखा गया था।
राज्य सरकार ने वन-आधारित आर्थिक गतिविधियों और पारंपरिक शिल्प के माध्यम से आदिवासी आजीविका को मजबूत करने की योजनाओं की भी घोषणा की। इस में पिथोरा चित्रकला, बांस शिल्प और मिट्टी के बर्तन जैसे कार्यों में लगे कारीगरों के लिए मदद शामिल है। साथ ही वन धन विकास केंद्रों के विस्तार को भी शामिल किया गया है, जो वन उत्पादों में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देते हैं। ऐसे ५०० से अधिक केंद्र पहले से ही संचालित हैं, जो आय-सृजन गतिविधियों के माध्यम से बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं का समर्थन कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त १०० करोड़ रुपये का एक आदिवासी पर्यटन सर्किट प्रस्तावित किया गया है, जो बेणेश्वर धाम और अन्य आदिवासी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बनाया जाएगा। इस परियोजना से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की उम्मीद है।
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