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महाराष्ट्र में आयोजित आदिवासी उत्सव को ले कर विवाद

आदिवासी विकास के निधि का दुरुपयोग का आरोप

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प्रातिनिधिक चित्र।

नागपुर (महाराष्ट्र, भारत): महाराष्ट्र में आयोजित एक आदिवासी लोक कला उत्सव को ले कर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाया गया है कि इस कार्यक्रम में आदिवासी विकास के लिए दिये गए निधि का दुरुपयोग किया जा रहा है।

कई आदिवासी संगठनों ने नागुपर जिले के पारशिवनी में आयोजित किए जा रहे कुंवारा भिवसेन आदिवासी लोक कला उत्सव में फिल्म कलाकार हेमा मालिनी के प्रस्तावित नृत्य कार्यक्रम का विरोध किया है।

नागपुर में शुक्रवार को आदिवासी विकास विभाग की अपर आयुक्त को ज्ञापन सौंपते आदिवासी कार्यकर्ता।

आदिवासी संगठनों के एक प्रतिनिधि मंडल ने शुक्रवार को नागपुर में महाराष्ट्र सरकार के आदिवासी विकास विभाग की अपर आयुक्त के साथ मुलाकात की और उन्हें इस बारे में एक ज्ञापन दिया। प्रतिनिधि मंडल ने कार्यक्रम में बदलाव करने का सुझाव दिया। ज्ञापन में कहा गया कि आदिवासियो की परंपरा और बोली बहुत समृद्ध है। ऐसे में फिल्मी कलाकारों के कार्यक्रम रखना गलत है और यह आदिवासी संस्कृति के साथ छेड़छाड़ है।

इस समय कुवारा भिवासन पंचकमेटी, नेशनल गोंडवाना सदोम संघ, आदिवासी विकास युवा परिषद, गोंडवाना महिला/युवा क्रांति सेना, आदिवासी संग्राम परिषद, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, बिरसा ब्रिगेड, अखिल गोंडवाना अल्पसंख्यक संघ, गोंडवाना सेना, ऑफरूट संगठन, भारतीय जनता पार्टी आदिवासी अघाड़ी, बिरसा मुंडा यूथ फोर्स, भीमलपेन क्रांति दल, इंडिजिनस स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन, बिरसा क्रांति दल, कुवारा भिवासन पालकी यात्रा कमेटी, आदिवासी संयुक्त मोर्चा और गोंडसभा पाठशाला सोसाइटी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

इसी बीच यहाँ जारी एक वक्तव्य में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हरीश उईके ने कहा कि नागुपर जिले के पारशिवनी में आयोजित किए जा रहे कुवारा भिवसेन आदिवासी लोक कला उत्सव के नाम पर आदिवासी विकास विभाग के निधि का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस कार्यक्रम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में फिल्म कलाकार हेमा मालिनी के “द्रौपदी नृत्य समूह” का कार्यक्रम रखा गया है, जिसका आदिवासी संस्कृति या भीमाल पेन के इतिहास के साथ कोई संबंध नहीं है।

उईके ने कहा कि इस उत्सव में भीमाल पेन के इतिहास और आदिवासी परंपरा को प्रस्तुत करने वाले विद्वानों को बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय व्यावसायिक कलाकारों पर धन खर्च किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से आदिवासी विकास विभाग के निधि को विभिन्न योजनाओं के नाम पर मोड़कर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं है, पाठ्यपुस्तकें और कपड़ों की कमी है। रामटेक तहसील में वर्षों से छात्रावास की सुविधा नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल तो हैं, लेकिन शिक्षक नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवाएं भी अत्यंत कमजोर हैं, रोजगार के अवसर नहीं हैं और शिक्षित युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है।

उईके ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विकास के लिए निर्धारित निधि का अन्य कार्यों में उपयोग करना संविधान का उल्लंघन है। यदि इस प्रकार का दुरुपयोग जानबूझकर किया जा रहा है, तो इसके लिए आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी और संबंधित जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उत्सव वित्त राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल के मार्गदर्शन में आयोजित हो रहा है।

यह उत्सव नागपुर जिले के पारशिवनी में 18 से 20 अप्रैल, 2026, तक होना है। इस कार्यक्रम का आयोजन दक्षिण मध्य क्षेत्र सांसकृतिक केंद्र और महाराष्ट्र सरकारे के आदिवासी विभाग द्वारा किया जा रहा है।

एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कार्यक्रम में विविध आदिवासी लोक कलाएं प्रस्तुत की जाएंगी।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि तीन दिनों तक चलने वाले “कुवारा भिवसेन महोत्सव” में तीन राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले छह आदिवासी नृत्य समूहों के 90 से अधिक आदिवासी कलाकार जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देंगे। इन में छत्तीसगढ़ के सैला कर्मा और गेड़ी नृत्य; मध्य प्रदेश के बैगा कर्मा, बैगा परधोनी और गुडुम बाजा; तथा महाराष्ट्र के तारपा, साओंगी मुखौटा नृत्य और खापरी नृत्य जैसे प्रसिद्ध आदिवासी नृत्य शामिल हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में हेमा मालिनी के कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि सोशल मीडीया पर जारी एक वीडीयो में जयस्वाल स्वयं यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि हेमा मालिनी का कार्यक्रम होगा।

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4 COMMENTS

  1. यह कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति के खिलाफ है। हेमा मालिनी जैसी फिल्म कलाकार वहां नृत्य कर रहीं हैं। पैसा सरकार का और आदिवासी विकास विभाग का लग रहा है। नृत्य का यह कार्यक्रम नहीं होना चाहिए क्यों कि यह सांस्कृतिक हमला है। इसका विरोध होना ही चाहिए।

  2. आदिवासी विकास विभाग का बजट बहुत ही आसान तरीके से खर्च होता है। बजट का आधा पैसा दूसरे विभागों में जाता है जो आदिवासियों पर खर्च होते हैं, जैसे महिला एवं बाल कल्याण, लोक निर्माण, कृषि, वगैरह। फिर बहुत ज़रूरी मेले, लाड़ली बहन, इन पर। फिर यह आदिवासी विकास विभाग के कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होगा। इसके अलावा विज्ञापन, बैठकें, पाँच या सात सितारा होटलों में मेहमाननवाज़ी में जाएगा। फिर बचा हुआ पैसा जनजातियों के अध्ययन में जाएगा। साथ ही ऐसी योजनाओं में जाएगा जिससे गैर सरकारी संगठनों को उपकृत किया जा सके। बस! हो गया हिसाब।

  3. सन 2014 में सांसद हेमा मालिनी ने मुंबई विश्वविद्यालय में 15 मिनट नृत्य करने के लिए सिर्फ़ 15 लाख रुपये लिए थे। आदिवासी विकास विभाग ने कितनी रकम दी, यह RTI से पता किया जाना चाहिए।

  4. हाँ। हमारा पैसा सिर्फ़ एक विशेष दल के लोगों पर खर्च हो रहा है। कुछ दिन पहले यवतमाल में एक नाटक हुआ और इस के लिए सत्तर लाख रुपये दिए गए। दूसरी ओर हमारे आदिवासी भाई दस हज़ार रुपये का लोन लेने के लिए बीस हज़ार रुपये खर्च कर रहे हैं। यह एक दुःखद बात है।

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