Home Oceania ऑस्ट्रेलिया में स्मृति दिवस समारोहों के दौरान नस्लीय नारेबाज़ी के बाद विवाद

ऑस्ट्रेलिया में स्मृति दिवस समारोहों के दौरान नस्लीय नारेबाज़ी के बाद विवाद

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ऑस्ट्रेलिया की सामाजिक सेवाओं की मंत्री तान्या प्लिबरसेक (बाएँ) शनिवार को सिडनी में एक स्मृति दिवस समारोह में पूर्व सैनिक अंकल रे (मिन्नीकॉन) के साथ।

कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया): ऑस्ट्रेलिया में एंज़ैक डे (स्मृति दिवस) समारोहों के दौरान सेना के वरिष्ठ पूर्व सैनिकों के खिलाफ नस्लीय नारेबाज़ी की घटनाओं के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

समारोह का हिस्सा होने वाले “वेलकम टू कंट्री” (देश में स्वागत) संबोधनों के दौरान भीड़ के एक हिस्से ने मूलनिवासी नेताओं के खिलाफ नारेबाज़ी की, जिससे नस्लवाद के खुले प्रदर्शन के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश फैल गया। वहीं कुछ पर्यवेक्षकों ने इस अवसर की पवित्रता बनाए रखने और ऑस्ट्रेलिया के मूल आदिवासी निवासियों पर ध्यान केंद्रित न करने की अपील की।

विवादास्पद घटनाएं २५ अप्रैल २०२६ को कई शहरों में हुईं और सैन्य इतिहास का सम्मान करने तथा राष्ट्रीय स्मरणों में मूलनिवासी मान्यता को शामिल करने के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को फिर से उजागर कर दिया। पुलिस ने कई स्थानों पर उपद्रवियों को हटाया, लेकिन कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक पाने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है। एक अधिकारी ने कहा कि “पुलिस हर घटना नहीं रोक सकती।”

कार्यकर्ताओं ने नस्लवाद को रोकने और उपद्रवियों को खेल मैदानों से हटाने या प्रतिबंधित करने के लिए ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल लीग (AFL) द्वारा अपनाई गई रणनीति जैसी व्यवस्था की भी माँग की। हालांकि, पुलिस का कहना है कि एंज़ैक डे समारोह सार्वजनिक स्थानों पर होते हैं, जबकि AFL बंद क्षेत्रों में आयोजित होता है जहां प्रवेश को सख्ती से नियंत्रित किया जा सकता है।

एंज़ैक डे हर साल ऑस्ट्रेलियन और न्यूज़ीलैंड आर्मी कोर (ANZAC) के सैनिकों के युद्धों और शांति मिशनों, विशेष रूप से प्रथम विश्व युद्ध में किए गए बलिदानों को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। लेकिन इस वर्ष इन समारोहों में उपस्थित कुछ लोगों ने औपचारिक मूलनिवासी स्वीकृतियों, जिन्हें आमतौर पर “वेलकम टू कंट्री” भाषण कहा जाता है, के दौरान असहमति जताई। ये संबोधन ऑस्ट्रेलिया में एक मूलनिवासी परंपरा हैं, जिसमें स्थानीय मूलनिवासी बुजुर्ग पारंपरिक भूमि पर उपस्थित लोगों का स्वागत करते हैं।

हूटिंग और टोका-टाकी पर तुरंत प्रतिक्रिया आयी। इन कृत्यों को नस्लवादी और अपमानजनक बताया गया। पूर्व सैनिक और मूलनिवासी नेता रे मिन्नीकॉन ने इन व्यवधानों की निंदा करते हुए कहा कि ये गहरे जड़ जमाए नस्लवाद और राष्ट्रीय स्मरणों में मूलनिवासी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के उचित स्थान को स्वीकार करने से इनकार को दर्शाते हैं। मिन्नीकॉन ने कहा, “हूटिंग उन पूर्वाग्रहों और प्रतिरोध का स्पष्ट उदाहरण है, जिनका सामना मूलनिवासी ऑस्ट्रेलियाई अब भी करते हैं।”

उधर समाज एक बड़े हिस्से ने विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों, जिनमें एंज़ैक डे भी शामिल है, में “वेलकम टू कंट्री” संबोधनों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की है। आलोचकों का तर्क है कि पारंपरिक सैन्य दिवस तटस्थ होना चाहिए और केवल शहीद सैनिकों को सम्मान देने पर केंद्रित होना चाहिए, न कि उन सांस्कृतिक प्रथाओं के साथ जो राजनीतिक हैं। एक पूर्व सैनिक द्वारा लिखे गए एक ऑनलाइन लेख में एंज़ैक डे का महत्व कम होने पर भी चिंता जताई गई। एंज़ैक डे समारोहों को तटस्थ रहना चाहिए, क्योंकि सशस्त्र बलों के सैनिकों का बलिदान उनकी जड़ों या धर्म के परे होते हैं।  कुछ अन्य व्यक्तियों ने सैन्य स्मरण को मूलनिवासी मान्यता की बढ़ती मांगों से स्पष्ट रूप से अलग करने की भी मांग की।

कुछ आलोचकों ने यह भी दावा किया कि “वेलकम टू कंट्री” संबोधन बहुत अधिक बार होने लगे हैं और इसलिए उनका मूल्य कम हो रहा है। वे एंज़ैक डे सेवाओं में इन संबोधनों को शामिल किए जाने के भी खिलाफ हैं।

फेसबुक पर एक पोस्ट में ऑस्ट्रेलिया की सामाजिक सेवाओं की मंत्री तान्या प्लिबरसेक ने सिडनी में एंज़ैक डे समारोह के दौरान “वेलकम टू कंट्री” संबोधन देते समय व्यवधानों के बीच संयम बनाए रखने के लिए मिन्नीकॉन की सराहना की और उनकी ”अपमानजनक कृत्य के सामने स्पष्टता और दृढ़ता” के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

“वेलकम टू कंट्री” एबोरिजिनल और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रथा है। परंपरागत रूप से, समारोह स्थानीय मूलनिवासी लोगों द्वारा किया जाता है और इसमें भूमि पर आने वाले आगंतुकों का औपचारिक स्वागत या आशीर्वाद शामिल होता है। यह प्रथा मूलनिवासी समुदायों के अपने पैतृक क्षेत्रों के साथ संबंध के प्रति सम्मान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

रिटर्न्ड एंड सर्विसेज लीग ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RSL) पूर्व सैनिकों के लिए काम करनेवाली संस्था है, जो देश के कई स्थानों पर एंज़ैक डे का आयोजन करती है।

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