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अजजा कोटा न होने पर हंगामे के बाद महाराष्ट्र में भर्ती विज्ञापन रद्द

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महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके (केवल प्रातिनिधिक चित्र)।

मुंबई (महाराष्ट्र, भारत): आदिवासी उम्मीदवारों के लिए कोटा न होने पर बड़े पैमाने पर हुए हंगामे के बाद महाराष्ट्र सरकार को आदिवासी विकास विभाग में चौकीदारों की भर्ती के लिए जारी एक विज्ञापन रद्द करना पड़ा।

महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने अधिकारियों को विज्ञापन वापस लेने का आदेश दिया, क्योंकि इसमें अनुसूचित जनजाति (अजजा) उम्मीदवारों के लिए आरक्षण शामिल नहीं था। मंत्री ने यह भी आदेश दिया कि एक नया भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए जिसमें अजजा श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण दर्शाया हो।

विज्ञापन में अजजा आरक्षण ना होने पर कई संगठनों ने राज्यभर में कई स्थानों पर विरोध दर्ज किया, जिसके बाद मंत्री ने मंगलावार को ये निर्देश जारी किए। कई आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने गोंदिया, नाशिक और चंद्रपुर सहित राज्य के कई स्थानों पर इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपे। तुरंत कार्रवाई करते हुए उइके ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक बुलाई और उन्हें विज्ञापन वापस लेने तथा मौजूदा नियमों के अनुरूप नया विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया।

उइके ने कहा कि संशोधित भर्ती प्रक्रिया में अजजा उम्मीदवारों के लिए आरक्षण शामिल होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पात्र आवेदक अवसर से वंचित न रहे। उन्होंने जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील भी की और आश्वासन दिया कि सरकार आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

विवाद उस समय शुरू हुआ जब महाराष्ट्र सरकार के आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त कार्यालय ने २७ अप्रैल २०२६ को राज्य के विभिन्न जिलों में ४१६ चौकीदारों की भर्ती के लिए एक विज्ञापन जारी किया। ये पद अहिल्यानगर, धुले, नंदुरबार, नाशिक, जलगांव, पुणे, ठाणे, रायगढ़, पालघर, सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, यवतमाल, अमरावती, नांदेड़, हिंगोली, अकोला, चंद्रपुर, गडचिरोली, भंडारा, गोंदिया, नागपुर और वर्धा में भरे जाने हैं। विज्ञापन में अनुसूचित जाति (SC), घुमंतू जनजाति (NT), विमुक्त जनजाति (DT) और अन्य श्रेणियों के लिए आरक्षण दर्शाया गया था, लेकिन इसमें ST उम्मीदवारों के लिए कोई भी पद आरक्षित नहीं दिखाया गया था। इससे राज्य के आदिवासी समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार को मंगलवार को विज्ञापन वापस लेना पड़ा।

इससे पहले अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजे गए एक ज्ञापन में कहा कि भर्ती विज्ञापन में ST कोटे का न होना महाराष्ट्र के आदिवासी लोगों के साथ अन्याय है।

इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को १५१ ग्रूप सी और ग्रूप डी के उन पदों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया जिन्हें पहले निष्क्रिय घोषित किया गया था। इन पदों को मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अत्याचार के पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरियां देने के लिए एकमुश्त विशेष उपाय के रूप में भरा जाएगा। सरकार ने ऐसे नियुक्तियों के लिए नवंबर २०२५ में एक विस्तृत अधिसूचना जारी की थी।

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