नई दिल्ली (भारत): केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम ने हाल ही में देशभर में एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों (EMRS) के निर्माण की प्रगति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की।
एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस बैठक का आयोजन भारत के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा किया गया था। इस बैठक में शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें केंद्रीय और राज्य सरकारों के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तथा केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग (CPWD) के अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा असम, छत्तीसगढ़, मेघालय, मिजोरम, ओड़िशा, राजस्थान, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने बैठक में वर्चुअल मोड के माध्यम से भाग लिया।

EMRS जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को कक्षा ६ से १२ तक गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करना है। इस योजना का उद्देश्य शैक्षिक अंतर को पाटना और आदिवासी बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें अकादमिक, खेल और कौशल शामिल हैं।
ओराम ने चल रहे निर्माण कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति की व्यापक समीक्षा की। बैठक के दौरान प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसियों ने प्रगति रिपोर्ट और पूर्णता के लिए निर्धारित समयसीमा प्रस्तुत की। हर एजेंसी और हर राज्य के काम की समीक्षा की गई।
ओराम ने परियोजनाओं के समय पर पूर्ण होने के महत्व पर जोर दिया क्योंकि यह दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निकट निगरानी के लिए बार-बार क्षेत्रीय दौरे करने का निर्देश भी दिया। मंत्री ने चेतावनी दी कि परियोजनाओं में किसी भी देरी के लिए संबंधित निर्माण एजेंसी जिम्मेदार ठहराई जाएगी।
जनजातीय कार्य मंत्रालय में सचिव रंजना चोपड़ा ने कि कि EMRS योजना मंत्रालय की प्रमुख पहल है। उन्होंने प्रगति को प्रभावित करने वाली बाधाओं, जैसे कि पहुँच मार्ग का ना होना, पानी की कमी और बिजली की लाइनों के स्थानांतरण को सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्रीय आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा सोसाइटी (NESTS) डॉ. प्रतिभा वर्मा की आयुक्त ने निर्माण की समग्र स्थिति और पूर्णता के लिए निर्धारित कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने ७२८ EMRS को मंजूरी दी है, जिनमें से ४२८ स्कूल भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, २४९ निर्माणाधीन हैं और ४६ पूर्व-निर्माण चरण में हैं।
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