नई दिल्ली (भारत) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को देश के विभिन्न भागों में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित ७५ अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं का आभासी तौर पर उद्घाटन करेंगी। साथ ही वे बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान के नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र में स्थापित प्रशिक्षण सुविधा का भी उद्घाटन करेंगी।
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सहयोग से संचालित हैं और इनका उद्देश्य खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स और उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुभवात्मक शिक्षा द्वारा आदिवासी छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना है। इस पहल से आदिवासी युवाओं के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा से जुड़ने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आजीविका-भविष्य बनाने के नए मार्ग खुलने की संभावना है।
भारतीय विज्ञान संस्थान में जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से विकसित प्रशिक्षण सुविधा का उद्देश्य जनजातीय छात्रों को सेमी कंडक्टर निर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों में उन्नत प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है, जिससे वे विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते रणनीतिक क्षेत्रों में से एक में अवसरों के लिए तैयार बनें।
यह उद्घाटन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बुधवार को आयोजित एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों (ITDA) और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं (ITDP) के सुदृढ़ीकरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के दौरान होगा। यह सम्मेलन भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है। सम्मेलन में प्रधान सचिव, जनजातीय कल्याण विभागों के आयुक्त, जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के निदेशक, भारत में जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए गठित प्रशासनिक और विकासात्मक संस्थाएं ITDA और ITDP के अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और देशभर के पेशेवर प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन में २६ राज्यों और ४ केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
यहाँ जारी एक अधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस सम्मेलन में चार मुख्य क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होगा, जो इस प्रकार हैं – संस्थागत ढांचा और मानव संसाधन; निधि प्रवाह और वित्तीय संरचना; निगरानी, मूल्यांकन और सूचना प्रौद्योगिकी; और अभिसरण और योजना कार्यान्वयन। इन विमर्श के परिणामस्वरूप ITDA और ITDP को सुदृढ़ बनाने के लिए एक राष्ट्रीय भविष्य कार्य योजना तैयार होने की संभावना है। यह सम्मेलन मंत्रालय के उन व्यापक प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य साक्ष्य-आधारित नीतिगत पहल और संस्थागत बदलाव द्वारा जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सुशासन में बेहतरी, सेवा प्रदान करने में सुधार लाना और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान करना है।
सम्मेलन में जनजातीय कार्य मंत्रालय “सबसे दूर सबसे पहले” नामक फिल्म भी प्रदर्शित करेगा, जो जनजातीय गरिमा उत्सव के परिवर्तनकारी प्रभाव और देश भर में जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
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