वैतांगी (न्यूजीलैंड): न्यूजीलैंड के उप प्रधानमंत्री डेविड सिमोर के उस बयान से विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद कुल मिलाकर देश की आदिवासी माओरी जनसंख्या के लिए सकारात्मक था। बयान देने के अगले दिन सिमोर को घेराबंदी का सामना करना पड़ा।
राष्ट्रीय वैतांगी दिवस पर सिमोरे ने कहा कि भले ही उपनिवेशवाद अधूरा था, लेकिन इससे कुछ लाभ भी हुआ और उपनिवेशवाद पूरी तरह हानिकार नहीं था। इसके अगले दिन एक कार्यक्रम में सिमोर जैसे ही भाषण देने खड़े हुए उनके खिलाफ नारे लगाए गए और उन्हे बोलने से रोकने की कोशिश की गई।
वैतांगी वह जगह है जहां सन १८४० में ब्रिटिश अधइकारी और माओरी प्रतिनिधियों के बीच ओक समझौता हुआ जिससे दोनों पक्षों के बीच संबंधों को नियंत्रित करने के लिए सिद्धांत स्थापित किए गए थे। माओरी समुदाय का मानना है कि सिमोर का बयान उपनिवेशवाद के गहरे नुकसान और स्थायी धरोहरों के प्रति अवमानना है।
विशेष बात यह है कि सिमोर स्वयं माओरी वंश से हैं। लेकिन उन्होंने इस विवाद को महत्वहीन बताया। उनकी टिप्पणियाँ और उसके बाद की प्रतिक्रिया न्यूजीलैंड के उपनिवेशी अतीत को लेकर वहाँ मौजूद दरार को उजागर करते हैं।
बाद में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक कार्यक्रम में कहा कि माओरी समुदाय के समक्ष चुनौतियों को संबोधित करने की आवश्यकता है। यह विवाद देश में चुनाव से पहले बढ़ी हुई राजनीतिक गतिविधियों के बीच आया है, जिसमें नस्ल, समानता और ऐतिहासिक पहचान जैसे मुद्दे प्रमुखता से उभर रहे हैं।
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