विंडो रॉक (एरिज़ोना, संयुक्त राज्य अमेरिका): नवाजो राष्ट्र परिषद ने औपचारिक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) और अमेरिकी आव्रजन और सीमा-शुल्क प्रवर्तन (ICE) से आदिवासी पहचान पत्रों को मूलनिवासी अमेरिकियों के लिए वैध पहचान पत्र के रूप में मान्यता देने की अपील की है।
यह मांग नवाजो राष्ट्र परिषद द्वारा पारित एक प्रस्ताव में की गई। आव्रजन प्रवर्तन के दौरान सरकारी अधिकारियों द्वारा आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ हाल में किए जा रहे व्यवहार के चलते यह प्रस्ताव पारित किया गया। परिषद ने कहा कि इन पहचान पत्रों को मान्यता देना मूलनिवासी राष्ट्रों की संप्रभुता को पुष्टि करेगा। परिषद ने कहा कि मूलनिवासी व्यक्तियों के साथ गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार होना चाहिए। परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव DHS और ICE से यह अनुरोध करता है कि वे आदिवासी पहचान पत्रों को वैध दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करें, ठीक उसी तरह जैसे वे राज्य-निर्दिष्ट पहचान पत्रों या पासपोर्ट को मान्यता देते हैं।
इस सप्ताह की शुरुआत में पारित प्रस्ताव में अमेरिका में आदिवासी राष्ट्रों के लंबे इतिहास और उनके सदस्यों की कानूनी स्थिति निर्धारित करने के अधिकार पर बल दिया गया है। आदिवासी पहचान पत्र विभन्न मूलनिवासी राष्ट्रों द्वारा जारी किए जाते हैं। यह पहचान पत्र उन व्यक्तियों के लिए पहचान, सदस्यता और नागरिकता का प्रमाण होते हैं जो उन जनजातियों से संबंधित होते हैं। हालांकि आदिवासी लोगों ने आरोप लगाया है कि जब इन पहचान पत्रों को सरकारी अधिकारियों को दिखाने के बावजूद हमारी साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। विशेषकर उन स्थितियों में जब उन्हें ICE एजेंटों द्वारा हिरासत में लिया जाता है या पूछताछ की जाती है। आदिवासी पहचान पत्रों को मान्यता न मिलने के कारण भ्रम, देरी और कुछ मामलों में मूलनिवासी नागरिकों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार हुआ है।
नवाजो राष्ट्र अमेरिका का सबसे बड़ा मूलनिवासी समूह है और अमेरिकी मूलनिवासी आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अमेरिका में कई वर्षों से आदिवासी राष्ट्र अपनी संप्रभुता और उनके नागरिकों के अधिकारों की अधिक मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन प्रयासों में एक केंद्रीय मुद्दा आदिवासी पहचान पत्रों को वैध पहचान के रूप में मान्यता देना रहा है। कई मूलनिवासी नेताओं का मानना है कि इन पहचान पत्रों को मान्यता न देना मूलनिवासी समुदायों और उनके कानूनी स्थान को लेकर एक व्यापक असम्मान और गलतफहमी को दर्शाता है। यह मुद्दा खासकर महत्वपूर्ण है क्योंकि देश भर में बढ़ती हुई आव्रजन प्रवर्तन गतिविधियाँ उन क्षेत्रों में हो रही हैं जहां बड़े पैमाने पर मूलनिवासी आबादी है।
DHS और ICE ने अभी तक परिषद के प्रस्ताव पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। लेकिन आदिवासी नेता मानते हैं कि इतने बड़े आदिवासी समूह द्वारा किए गए इस दबाव से ये एजेंसियाँ अपने रवैये पर पुनर्विचार करेंगी।
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