विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश, भारत): आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह चार जिलों में आदिवासी गांवों के नाम और सीमाओं को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए और इन्हें जनजातीय कल्याण विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित करे। यह निर्देश इस सप्ताह की शुरुआत में एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें गांवों की अस्पष्ट सीमाओं और आदिवासी भूमि में अतिक्रमण से जुड़े पुराने मुद्दों को उजागर किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर और न्यायाधीश चला गुनारंजन की एक खंडपीठ ने सरकार को आदिवासी गांवों के स्थान और सीमाओं का विस्तृत विवरण अपलोड करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। इसके साथ ही सरकार को छह सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल कर किए गए काम का विवरण देने का भी निर्देश दिया गया। यह जनहित याचिका एकीकृत आदिवासी विकास संस्था (ITDC) के वेंकटा शिवराम द्वारा आदिवासी भूमि अधिकारों की सुरक्षा के लिए दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि पूर्व श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापत्तनम और पूर्व गोदावरी जिलों में ५९५ ग्राम पंचायतों के अंतर्गत ८७८ राजस्व गांव हैं जिन्हें आदिवासी या अनुसूचित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है, लेकिन इनकी सीमाएँ अभी तक आधिकारिक रूप से निर्धारित नहीं हुई हैं। इससे गैर-आदिवासी व्यक्तियों और संस्थाओं को पारंपरिक रूप से आदिवासी समुदायों द्वारा उपयोग की जाने वाली उपजाऊ भूमि पर कब्ज़ा करने का मौका मिल जाता है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में अवैध खनन गतिविधियाँ बढ़ गई हैं, जिसका एक कारण स्पष्ट सीमांकन की कमी और संरक्षित भूमि की पहचान में कठिनाई है।
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