मुंबई (महाराष्ट्र, भारत): महाराष्ट्र के आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने निर्णय किया है कि स्वास्थ्य विभाग में नई पदभर्ती के दौरान सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों में चिकित्सकों औ अधिकारियों की नियुक्तियाँ की जाएगी। यह आदेश स्वास्थ्य विभाग ने इस सप्ताह के प्रारंभ में जारी किया।
आदेश में कहा गया है कि नई पदभरती के दौरान तथा सेवाकाल में स्नातकोत्तर (PG) उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सकों और अधिकारियों की नियुक्ति सबसे पहले आदिवासी क्षेत्रों में की जाएगी। इन क्षेत्रों के रिक्त पदों को भरने के बाद ही गैर-आदिवासी क्षेत्रों में नियुक्तियां की जाएंगी।
लंबे समय से आदिवासी और दूरस्थ जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पदों की बड़ी संख्या को देखते हुए लिया गया है। पिछले एक वर्ष में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने राज्य के कई आदिवासी और दुर्गम जिलों का दौरा कर वहां की स्वास्थ्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी, अधूरी सुविधाएं और रिक्त पदों की समस्या सामने आई थी। निरीक्षण में पाया गया कि आदिवासी और दुर्गम इलाकों में लंबे समय तक पद खाली रहते हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ता है। इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब प्राथमिकता के आधार पर आदिवासी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
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