मुंबई (महाराष्ट्र, भारत): महाराष्ट्र सरकार ने सन २०२६-२७ के बजट में जनजातीय समुदायों के कल्याण और विकास के लिए २१,००० करोड़ रुपये के प्रावधान का प्रस्ताव रखा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले सप्ताह राज्य विधानमंडल में सन २०२६-२७ का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि आदिवासी उप-योजना के तहत २१,७२३ करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के सशक्तिकरण के लिए रानी दुर्गावती महिला सशक्तिकरण योजना, शबरी आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अमृत आहार योजना, नमो ट्राइबल स्मार्ट स्कूल अभियान, आदर्श आश्रम विद्यालय, भगवान बिरसा मुंडा सड़क संपर्क योजना, ठक्कर बप्पा आदिवासी विकास योजना और पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयं योजना जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
इसके अलावा बिरसा मुंडा कृषि क्रांति योजना के तहत जंगल से सटे गांवों में आदिवासी किसानों को बोरवेल और सोलर पंप के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। कातकरी, कोलम और माडिया जैसे विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों के लिए विशेष पैकेज दिया जाएगा। पारधी समुदाय के विकास के लिए भी विशेष पैकेज लाया जाएगा। इन पहलों का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।
सरकार की कई संस्थाओं के माध्यम से जनजातियों के लिए बड़े पैमाने पर विकास की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के लिए साल २०२६-२७ में काफी फंड दिया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार का वित्त विभाग फिलहाल स्वयं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। जनवरी २०२६ में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री अजीत पवार की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद फडणवीस ने वित्त विभाग का कार्य संभाला। अजीत पवार की मृत्यु के कुछ दिन बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को वित्त मंत्री बनाया गया, लेकिन बजट में शामिल प्रस्तावों का अध्य्यन करने के लिए उनके पास पर्याप्त समय ना होने के कारण फडणवीस ने ही बजट प्रस्तुत किया।
तुरंत अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें और हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें।




