Home In Brief “गोली से नहीं, हक़ देने से ख़त्म होगा नक्सलवाद”

“गोली से नहीं, हक़ देने से ख़त्म होगा नक्सलवाद”

नामदेव किरसान का लोकसभा में कथन, मांगा गडचिरोली जिले के लिए दस हजार करोड रुपये का विशेष पैकेज

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प्रातिनिधिक चित्र।

नई दिल्ली (भारत) सांसद नामदेव किरसान ने कहा है कि देश में नक्सलवाद केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है बल्कि सामाजिक और आर्थिक अन्याय से उपजी समस्या है, और इसी लिए वह गोली से नहीं, हक से समाप्त होगा।

सोमवार को लोक सभा में नियम १९३ के तहत नक्सलवाद पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए किरसान ने आदिवासी समुदाय से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाया। उन्होेंने  कहा कि नक्सलवाद का स्थायी समाधान गोली या दमन से नहीं, बल्कि आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकार दिलाकर ही संभव है। नक्सलियों और पुलिस के बीच संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान आम आदिवासी को ही झेलना पड़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार केवल संदेह के आधार पर निर्दोष आदिवासियों को गिरफ्तार किया जाता है और उन्हें वर्षों तक जेल में रहना पड़ता है। उन्होंने जोर दे कर कहा कि आदिवासियों को ‘सॉफ्ट टार्गेट’ के रूप में इस्तेमाल करना तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

लोक सभा में भाषण करते हुए गडचिरोली–चिमूर के सांसद नामदेव किरसान।

किरसान गडचिरोली–चिमूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। गडचिरोली जिला नक्सल-प्रभावित जिलों में से एक है।

उन्होंने कहा कि गडचिरोली जिले में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां चल रही हैं, खासकर सुरजागढ़ क्षेत्र में। इस का उल्लेख करते हुए किरसान ने कहा कि इन परियोजनाओं के कारण पर्यावरण और स्थानीय समाज पर गंभीर दुष्परिणाम हो रहे हैं। जलस्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है।

सांसद ने नक्सलवादी हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों की महिलाओं को ‘स्पेशल पुलिस ऑफिसर’ (SPO) के रूप में दी गई अस्थायी नौकरियों को बंद किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इन महिलाओं को स्थायी नौकरी देने की मांग की।

इसके अलावा उन्होंने मुख्यमत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में शुरू की गई ट्रक योजना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुरजागढ़ खनन परियोजना के तहत ८० आदिवासी युवाओं से ५०-५० हजार रुपये लिए गए थे, लेकिन न तो उन्हें ट्रक दिलाए गए और न ही पैसे लौटाए गए। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

वन विभाग द्वारा आदिवासियों को परेशान किए जाने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से खेती कर रहे आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है।

गडचिरोली को नक्सल प्रभावित और आकांक्षी जिला बताते हुए किरसान ने केंद्र सरकार से जिले के समग्र विकास के लिए दस हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मंजूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और न्यायसंगत विकास को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक नक्सलवाद जैसी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

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