नई दिल्ली (भारत) केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव ने केंद्रीय बजट 2026-27 को दूरदर्शितापूर्ण और समावेशी बताते हुए इसका स्वागत किया है और कहा है कि यह आदिवासी समुदायों को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में स्थापित करता है।
उरांव ने कहा कि यह बजट जनजाति बहुल क्षेत्रों में आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास के नए अवसर पैदा करने के साथ ही अनुसूचित जनजातियों की समग्र, क्षेत्र आधारित और जन केंद्रित प्रगति के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
उरांव ने कहा कि यह बजट जनजातीय मामलों के मंत्रालय की पहले से जारी पहलकदमियों को और मजबूती देता है। इनमें से कुछ प्रमुख हैं एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का विस्तार, जिससे दूरदराज के इलाकों में आदिवासी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में सुधार आएगा, समेकित ग्राम विकास कार्यक्रम जिसका लक्ष्य खास तौर से संवेदनशील आदिवासी समूहों को अवसंरचना, आजीविकाओं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, और आदिवासी क्षेत्रों की विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए स्वास्थ्य, पोषण, बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और युवा विकास से संबंधित समुदाय आधारित हस्तक्षेप।
उरांव ने जोर देकर कहा कि संघीय बजट 2026-27 विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह सुनिश्चित करता है कि जनजातीय समुदाय राष्ट्र निर्माण में सिर्फ लाभार्थी होने के बजाय सक्रिय हिस्सेदार भी हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बजट के प्रस्ताव संवहनीय आय सृजन, सामाजिक सशक्तीकरण और समावेशी विकास लाते हुए किसी भी जनजातीय समुदाय को पीछे नहीं छूटने देने के सरकार के संकल्प को पुष्ट करेंगे।
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