नई दिल्ली (भारत): आदिवासी नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में 2026 के पद्म पुरस्कारों के तहत गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किया गया।
केंद्रीय सरकार ने रविवार को 131 पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की सूची जारी की, जिसमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार विजेता शामिल हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रायल द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा को मान्यता देते हैं, जिनमें सार्वजनिक कार्य, कला, समाज सेवा, विज्ञान, शिक्षा और खेल शामिल हैं। शिबू सोरेन का नाम पद्म भूषण सम्मानित व्यक्तियों में शामिल है, जो आदिवासी राजनीति और सार्वजनिक सेवा में उनके स्थायी योगदान को दर्शाता है।
शिबू सोरेन, जिनका पिछले साल 4 अगस्त को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गए, भारत के आदिवासी अधिकार आंदोलन में एक प्रमुख हस्ती थे और झारखंड राज्य के निर्माण के मुख्य वास्तुकार थे। वे वर्तमान झारखंड राज्य के संथाल आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखते थे और उन्होंने 1970 के दशक के प्रारंभ में आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा की सह‑स्थापना की थी। उनका उद्देश्य आदिवासी समाज की हाशिए पर स्थिती और सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्करण को दूर करना था। उनका संघर्ष झारखंड के 15 नवम्बर 2000 को राज्य बनने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
लगभग पाँच दशकों के राजनीतिक करियर में सोरेन ने कई बार सांसद के रूप में दुमका निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वे राज्यसभा के सदस्य भी चुने गए। उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में भी काम किया। उनके नेतृत्व में आदिवासी कल्याण के लिए बनाई गई नीतियाँ और उनकी जमीनी स्तर पर सक्रियता उन्हें आदिवासी समुदायों में एक पूज्यनीय नेता बना दिया।
पद्म भूषण से सम्मानित शिबू सोरेन ने सार्वजनिक कार्यों में विशेष योगदान दिया और आदिवासी समुदायों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके निधन के बाद झारखंड में उन्हें और अधिक मरणोपरांत सम्मान देने की मांग उठी, जिसमें राज्य विधानसभा द्वारा भारत रत्न की सिफारिश भी शामिल थी, जो उनके राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए थी।
सोरेन के अलावा 2026 के पद्म पुरस्कारों में कई अन्य आदिवासी व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के पालघर जिले के संगीतकार भिकल्या लाडक्या धिंड्या को पारंपरिक आदिवासी वाद्य तारपा वादन की कला के संरक्षण के लिए पद्मश्री (कला) पुरस्कार के लिए चुना गया है।
जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय सोवा‑रिग्पा संस्थान (NISR) के पहले पूर्णकालिक निदेशक डॉ. पद्म गुरमेत को हिमालयी पारंपरिक चिकित्सा और उच्च ऊंचाई वाले औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए पद्मश्री (चिकित्सा) से सम्मानित किया गया। पश्चिम बंगाल के लेखक (संथाली भाषा) रबिलाल टुडू को साहित्य और शिक्षा क्षेत्र में पद्मश्री मिला। अरुणाचल प्रदेश के तेज़ी गुबिन को उनके समाज सेवा कार्यों के लिए पद्म श्री से नवाज़ा गया। नागालैंड के संगीयसांग एस पोंगेनर को आदिवासी लोक कला पर उनके प्रेरणादायक काम के लिए पद्मश्री मिला। मेघालय के हैली वार को उनके जीवनभर के काम के लिए पद्मश्री मिला। श्री वार ने जीवित जड़ पुलों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। असम की करबी लोक गायिका पोखिला लेक्तेपी को कला क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया गया, जिनकी आवाज़ ने करबी आंगलोंग की पहाड़ियों में चार दशकों से अधिक समय तक गूंज रही है।
भारत में ‘पद्म विभूषण’ को असाधारण सेवा के लिए, ‘पद्म भूषण’ को उच्च स्तर की सेवा के लिए और ‘पद्म श्री’ को किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा विशेष समारोह में दिए जाते हैं, जो सामान्यतः मार्च या अप्रैल के आस-पास राष्ट्रपति भवन में आयोजित होते हैं।
इस वर्ष के पुरस्कारों में भौगोलिक और विषयगत विविधता का प्रदर्शन हुआ है, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विविधता में योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य उस सेवा को मान्यता देना है जो भारत के सामाजिक ताने-बाने को सशक्त करती है और लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक जीवन में समावेशन को बढ़ावा देती है।
पद्म पुरस्कार समारोह, जो परंपरागत रूप से राष्ट्रपति भवन में आयोजित होता है, इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं को भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। शिबू सोरेन को पद्म भूषण प्रदान करने से आदिवासी अधिकारों, क्षेत्रीय पहचान राजनीति और सार्वजनिक सेवा में उनके स्थायी प्रभाव को रेखांकित किया गया है।
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