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बिली आइलिश की “चुराई गई ज़मीन पर कोई अवैध नहीं है” टिप्पणी उल्टी पड़ गई

पॉप स्टार को उनकी हवेली के आदिवासी ज़मीन पर स्थित होने को लेकर करना पड़ रहा है आलोचना का सामना

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बिली आइलिश

लॉस एंजेलिस (कैलिफ़ोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका): पॉप स्टार बिली आइलिश की “चुराई गई ज़मीन” पर की गई टिप्पणी उन्हीं पर उलटी पड़ गई है।

उन्हें अपनी “चुराई गई ज़मीन पर कोई अवैध नहीं है” टिप्पणी को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जो उन्होंने इस हफ्ते के शुरू में ६८वें ग्रैमी अवार्ड्स समारोह में अपनी स्वीकृति भाषण के दौरान की थी। यह टिप्पणी उन्होंने अमेरिकी आप्रवासन प्रवर्तन की निंदा करते हुए की थी, लेकिन अब उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि लॉस एंजेलिस में उनका करोड़ों डॉलर का महल टोंग्वा लोगों की आदिवासी ज़मीन पर बना है। टोंग्वा एक अमेरिकी मूलनिवासी जनजाति है, जिनकी प्राचीन ज़मीन लॉस एंजेलिस बेसिन के अधिकांश हिस्से में फैली हुई है। इस विवाद ने विभिन्न दृष्टिकोणों को उजागर किया है, जिसमें जनजातीय इतिहास की सही पहचान के लिए अपील से लेकर “प्रदर्शनकारी सक्रियता” के आरोप तक शामिल हैं। इस विवाद ने आदिवासी ज़मीन अधिकारों और सेलेब्रिटी सक्रियता पर फिर से चर्चा को जन्म दिया है।

ग्रैमी अवार्ड्स में बिली आइलिश ने एक पुरस्कार जीता। अपने भाषण में उन्होंने एक राजनीतिक संदेश दिया जो सामान्य पुरस्कार स्वीकृति भाषण से परे था। आभार व्यक्त करने के बाद, उन्होंने एक व्यापक सामाजिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “चुराई गई ज़मीन पर कोई अवैध नहीं है”, और इस मुद्दे पर निरंतर सक्रियता की आवश्यकता पर जोर दिया। यह टिप्पणी अमेरिकी सरका की आप्रवासन नीति और प्रवर्तन की आलोचना करने के लिए थी, लेकिन यह तुरंत ही बहस का केंद्र बन गई जब कई लोगोे ने उनके शब्दों और उनकी संपत्ति के स्वामित्व के बीच का विरोधाभास उजागर किया।

आलोचकों ने सोशल मीडिया पर उनके टिप्पणियों को पाखंडी बताते हुए यह तर्क किया कि उनका लॉस एंजेलिस स्थित घर, जिसकी कीमत लगभग ३ मिलियन डॉलर बताई जाती है, “चुराई गई ज़मीन” पर रहने का ही प्रमाण है। यह भी आलोचना की गई कि इस विषय पर केवल बयान देने की बजाय ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

टोंग्वा जनजाति को “पहले एंजेलिनो” के नाम से भी जाना जाता है। जनजाति के एक प्रतिनिधि ने पुष्टि की कि आइलिश का आवास जनजाति की प्राचीन ज़मीन पर स्थित है। लेकिन प्रतिनिधि ने ज़मीन की वापसी की कोई मांग नहीं की। बयान में कहा गया कि इस टिप्पणी से आदिवासी ज़मीनों का इतिहास उजागर हुआ। उन्होंने कहा कि भविष्य में आदिवासी ज़मीनों के बारे में चर्चा करते समय टोंग्वा का नाम स्पष्ट रूप लिया जाना चाहिए।

विवाद के बीच आइलिश ने अपने घर के स्थान या टोंग्वा के बयान पर आलोचना के बारे में कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस टिप्पणी का संदर्भ यह है कि मौजूदा शासक स्वयं अमेरिका के बाहर से आये थे और मूलनिवासी लोगों को खदेड़ कर उनकी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर अपना राज प्रस्थापित किया था।

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