Home In Brief नलखेड़ा में माँ शबरी जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न

नलखेड़ा में माँ शबरी जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न

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नलखेड़ा में माँ शबरी जन्मोत्सव पर मध्य प्रदेश के नलखेड़ा में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि एवं समाजजन। संबोधित करते हुए फगनसिंह कुलस्ते।

नलखेड़ा (मध्य प्रदेश, भारत) मध्य प्रदेश के आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा नगर में रविवार को माँ शबरी जन्मोत्सव को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण मनाया गया। इस अवसर पर भव्य चल समारोह का आयोजन भी किया गया। यह कार्यक्रम समस्त श्री भिलाला समाज, जिला आगर मालवा के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु शामिल हुए।

इस अवसर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, नई दिल्ली, के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद फगनसिंह कुलस्ते (अध्यक्ष – अजा/अजजा कल्याण संबंधी समिति, लोकसभा) मुख्य अतिथि थे। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष लक्की  जाधव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

माँ शबरी जन्मोत्सव पर मध्य प्रदेश के आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा में आयोजित भव्य चल समारोह।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह जयसवाल कॉलोनी, चार धाम के पीछे, बड़वादा रोड, नलखेड़ा से भव्य चल समारोह के साथ हुई। पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों और जयघोषों के साथ निकाली गई इस शोभायात्रा में महिला-पुरुष, युवा एवं बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे नगर में उत्सव का वातावरण देखने को मिला।

चल समारोह के पश्चात कार्यक्रम का समापन माँ बगलामुखी रिसॉर्ट, नलखेड़ा में आयोजित सभा के साथ हुआ। सभा को संबोधित करते हुए अतिथियों ने माँ शबरी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे निष्कलंक भक्ति, सेवा, समर्पण और सामाजिक समता की प्रतीक हैं। प्रभु श्रीराम द्वारा शबरी माता के प्रेमपूर्वक अर्पित बेर स्वीकार करना समाज को समानता और मानवता का संदेश देता है।

मुख्य अतिथि फगनसिंह कुलस्ते ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं और मूल्य भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज के सर्वांगीण विकास पर बल दिया। विशेष अतिथि लक्की जाधव ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस भव्य आयोजन ने नलखेड़ा में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और धार्मिक श्रद्धा का सुंदर संदेश दिया। माँ शबरी जन्मोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता और एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरा।

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