पलामू (झारखंड, भारत) झारखंड के पलामू जिले में 11 और 12 फरवरी 2026 को वार्षिक आदिवासी महाकुंभ मेले का आयोजन होगा। राजकीय आदिवासी महाकुंभ मेला पलामू जिले के दुनियाखांड मैदान में आयोजित होता है।
आयोजकों ने बताया कि इस मेले की शुरुआत 1990 के आसपास हुई थी और यह राजा मेदिनीराय की याद में आयोजित किया जाता है।
मेले में झारखंड सहित कई सीमावर्ती राज्यों के आदिवासी समुदाय भारी संख्या में भाग लेते हैं। राजा मेदिनीराय चेरो राजवंश के सबसे प्रतापी राजा थे. उनका किला आज भी पलामू टाइगर रिजर्व के जंगलों में स्थित है। इस किले से कुल 14 चेरो राजाओं ने शासन किया था। पलामू पर इस राजवंश का शासन लगभग 200 वर्षों तक रहा, जिसमें राजा मेदिनीराय का कार्यकाल (1658-1674 ईस्वी) सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
राजा मेदिनीराय केवल एक शासक ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत भी हैं। उनके शासनकाल में प्रजा खुशहाल थी तथा खेती और व्यापार फल-फूल रहा था। राजा मेदिनीराय के शासनकाल से जुड़ा एक प्रसिद्ध स्लोगन आज भी लोकगीतों में गाया जाता है: “धनी धनी राजा मेदिनीयां, घर-घर बाजे मथानियां”। इसका अर्थ है कि राजा मेदिनीराय के शासनकाल में हर घर में खुशहाली थी और दूध-दही की कोई कमी नहीं थी।
राजा मेदिनीराय की खासियत थी कि वे रात के अंधेरे में भेष बदलकर प्रजा की समस्याएं सुनते थे तथा हर घर में मवेशी पहुंचवाते थे ताकि कोई भूखा न रहे। उन्होंने खेती, पशुपालन और व्यापार को बढ़ावा दिया और प्रजा की भलाई के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं।
हर साल की तरह इस बार भी आदिवासी महाकुंभ मेले में संस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक खेल, स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, राजा मेदिनीराय के जीवन से जुड़े विशेष आयोजन और इतिहास पर सेमिनार भी होंगे।
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