नई दिल्ली (भारत): आदिवासी कला महोत्सव (ट्राइब्स आर्ट्स फेस्ट या TAF) २०२६, जो पूरे भारत की आदिवासी कला परंपराओं को प्रदर्शित करेगा, २ मार्च से नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
इस महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। यह त्रावणकोर हाउस में होगा। इसमें ७० से अधिक जनजातीय कलाकार और लगभग ३० आदिवासी कला परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाली १,००० से अधिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय कला और संस्कृति की पहचान को सुदृढ़ करना है। साथ ही जनजातीय समुदायों के लिए पहचान, गरिमा और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर सृजित करना है।
महोत्सव ३ मार्च से १३ मार्च तक खुला रहेगा। इसका आयोजन भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) और राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (NGMA) के सहयोग से किया जा रहा है। इस महोत्सव से जनजातीय कलाकारों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने कहा कि यह महोत्सव भारत की सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था में जनजातीय कला के संरक्षण, संवर्धन और मुख्यधारा में लाने के दृष्टिकोण का प्रतीक है।
प्रदर्शनी में वारली, डोकरा, भील, बोडो, कोया और पिथोरा जैसी प्रमुख जनजातीय कला शैलियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। भाग लेने वाले प्रतिष्ठित जनजातीय कलाकारों में जपानी श्याम, राजेश चैत्य वांगड़, सुधा कुमारी, लाडो बाई, किंगसन स्वार्गियारी और थोर्रेम वेणुमाधवराव शामिल होने की संभावना है।
महोत्सव के दौरान चर्चासत्र, व्याख्यान, कार्यशालाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महिला कलाकारों के लिए विशेष सत्र होंगे।
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