गोंडवाना समाज में “गुढी पाडवा” ऐसा कोई त्यौहार नहीँ है। पर इस समय में एक ‘पुनेमी’ त्यौहार मनाया जाता है, जिसे मांड अम्मास पूजा / गोंगो कहा जाता है।
“मांड अम्मास” का अर्थ गोंडी भाषा में अर्थ होता है वर्ष समाप्ती की अमावस्या। यह त्यौहार फाल्गुन माह के अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन इष्ट पेनों (देवों) की पूजा की जाती है, और प्रार्थना की जाती है कि आनेवाला नया वर्ष सभी को सुखमय एवं लाभदायी हो। सगाजन एक दूसरे के घर जाकर हल्दी चावल का टिका लगाकर नूतन वर्ष की शुभकामना “सेवा जोहार” या “जय सेवा” कह कर प्रदान करते है।

दूसरे दिन नए साल का पहला दिन होता है। उसे “मांड अम्मास पाडवा” कहते है। इस दिन आदिवासी किसान सगाजन अपने खेत की पूजा करते है जिसे “तोड़ी पूजा” कहा जाता है। नए साल की नई फसल के लिए हवा, पानी, मिट्टी, धूप इत्यादी प्राकृतिक शक्तियों की निरंतर सेवा प्राप्त होती रहे. इसके लिए प्रकृति पूजा भी करते है।
(फाल्गुन अमावस्या १९ मार्च 2026 / चैत्र मास आरंभ २० मार्च २०२६)
(गोंडीपूनेम = सत्य का मार्ग, Path of Truth)
दिनेश उमाताई अंबादास शेराम
महामंत्री, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, नागपूर विभाग, विदर्भ विभाग
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