Home In Brief भिमाल पेन जन्मोत्सव जत्रा २ से १३ अप्रैल २०२६ तक

भिमाल पेन जन्मोत्सव जत्रा २ से १३ अप्रैल २०२६ तक

श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का संगम होगा महाराष्ट्र के भिवाड़ गाँव में

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प्रातिनिधिक चित्र

नागपुर (महाराष्ट्र, भारत): श्री कुंवारा भिवसन देवस्थान पंचकमेटी द्वारा भिवाड़, तहसील पारशिवनी, जिला नागपुर (महाराष्ट्र) में आयोजित होने वाली भिमाल पेन जन्मोत्सव जत्रा इस वर्ष गुरुवार २ अप्रैल २०२६ से सोमवार १३ अप्रैल २०२६ तक होगा। इस में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

आयोजकों ने कहा कि यह जत्रा हर वर्ष पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की जाती है और क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। भिमाल पेन के जन्मोत्सव के अवसर पर विविध धार्मिक अनुष्ठान, भजन, महाप्रसाद तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला रखी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहेगा।

कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा इस प्रकार है –

जत्रा का शुभारंभ २ अप्रैल को सुबह ४ बजे गढ़ मंदिर पूजा से होगा। इसके बाद सुबह ६ से ९ बजे तक अभिषेक एवं वस्त्र अर्पण, सुबह १० बजे ध्वज वंदन तथा १०.३० से दोपहर १२ बजे तक महापूजा का आयोजन किया जाएगा। दोपहर १२ बजे आरती और २ बजे महाप्रसाद वितरण होगा। उसी दिन दोपहर २.३० बजे से भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।

इसके पश्चात ३ अप्रैल, ४ अप्रैल, ६ अप्रैल और १२ अप्रैल को दोपहर २ बजे भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ६ अप्रैल को शाम ६ बजे ‘खापरी’ (पंचमी दिवस) विशेष कार्यक्रम रखा गया है। जत्रा का समापन १३ अप्रैल को गोंगो के उपरांत प्रसाद वितरण के साथ किया जाएगा। पूरे जत्रा काल के दौरान प्रतिदिन दोपहर १२ बजे एवं शाम ६ बजे नियमित रूप से आरती और प्रसाद वितरण किया जाएगा।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गजानन आतराम (मो. 9834570002), शांताराम मडावी (मो. 9970616722), रुपराव बोरेकर (मो. 9359273186), रवि धुर्वे (मो. 9146401442) और शेषराव पदम (मो. 9763069300) सहित अन्य पदाधिकारी कार्य कर रहे हैं।

भिमाल पेन ठाना नागपुर से लगभग ५५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नागपुर से कोराडी होते हुए खापरखेड़ा, पारशिवनी और चारगांव मार्ग से वहाँ पहुंचा जा सकता है।

आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन जत्रा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भक्ति भाव से दर्शन करें और समाज की एकता व परंपरा को मजबूत बनाने में सहयोग करें।

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