इंदौर (मध्य प्रदेश, भारत) मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए आदिवासियों के बच्चों से सरकारी कार्यक्रमों में केवल नृत्य (dance) करवाने पर सवाल उठाया है।
जनजातीय समुदाय के विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अधिकारियों के लिए दो दिनों की कार्यशाला पिछले सप्ताह यहाँ रखी गई थी। उसी समय पटेल ने यह तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि क्या आदिवासी बच्चे सिर्फ मनोरंजन के लिए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों में अपनेपन की कमी है और वे बच्चों का शोषण हो रहा है। उन्होंने पूछा, “ये बच्चे सुबह कहीं और डांस कर रहे थे और अब यहाँ? क्या आदिवासी बच्चे सिर्फ डांस करने के लिए हैं? क्या उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है?”
राज्यपाल ने यह भी कहा कि इन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देने के बजाय केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में व्यस्त रखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक चिंता का विषय है।
पटेल ने कहा कि सरकार द्वारा आदिवासी विकास के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका प्रभाव नजर नहीं आता। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए योजनाओं के सही क्रियान्वयन की कमी को गंभीर चिंता का विषय बताया।
उन्होंने चार सवाल पूछे – आदिवासी योजनाओं के लिए दिए गए सैकड़ों करोड़ रुपये का सही उपयोग क्यों नहीं हो रहा? आदिवासी विभाग में खर्च की पारदर्शिता और जवाबदेही क्यों नहीं है? आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति खराब क्यों है और बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं हैं? शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर केवल औपचारिकताएं ही क्यों निभाई जा रही हैं?
राज्यपाल ने यह भी कहा कि कई आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। भवनों की हालत जर्जर है और जरूरी संसाधनों का अभाव साफ दिखाई देता है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। केवल कागजी काम से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव दिखना जरूरी है।
कार्यशाला में मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। उन्हीं की मौजूदगी में पटेल ने अधिकारियों को लताड़ा।
तुरंत अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें और हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें।




