मंडला (मध्य प्रदेश, भारत) छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि आदिवासी संस्कृति देश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे संरक्षित करना तथा आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।
मंडला जिले के रामनगर में स्थित ऐतिहासिक मोतीमहल परिसर में मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित भव्य आदि उत्सव का समापन समारोह शनिवार को हुआ। उस में वे मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। डेका ने आदिवासी युवाओं से अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने का कि आदिवासी अपनी संस्कृति और पहचान ना छोड़ें। उन्होंने कहा कि रामनगर की पावन धरा जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।
कार्यक्रम में आदिवासी नृत्य, संगीत और पारंपरिक कला की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया। इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना और नई पीढ़ी को उनकी विरासत से जोड़ना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि आदि उत्सव में सहभागिता कर जनजातीय संस्कृति, इतिहास, परंपरा एवं गौरवशाली विरासत की अद्भुत झलक देखने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आदि उत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के गौरव, इतिहास और पहचान को संरक्षित एवं नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त अभियान है।
कुलस्ते ने कहा कि मोतीमहल का एक-एक पत्थर गोंडवाना साम्राज्य के पराक्रम, शौर्य और वैभव की गाथा कहता है। वीरांगना रानी दुर्गावती, गोंडवाना नरेश दलपत शाह तथा अमर शहीद शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह का संघर्ष एवं बलिदान हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्री संपतिया उइके, गुजरात के गुजरात के जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, पूर्व विधायक शशि ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, वरिष्ठ समाजसेवी प्रफुल्ल मिश्रा, जयदत्त झा, जिला पंचायत सदस्य शैलेष मिश्रा, रुद्रेश परस्ते, जिलाधिकारी राहुल नामदेव धोटे, पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शाश्वत सिंह मीना, उप-जिलाधिकारी सोनाली देव, जनजातीय कार्य विभाग में सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता, वेदप्रकाश कुलस्ते, चौगान सरपंच विमला उइके, श्रवण पराते उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जनजातीय लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत, लोकगाथाओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाओं, जनजातीय वेशभूषा एवं ऐतिहासिक विरासत पर आधारित प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही।
तुरंत अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें और हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें।




