नागपुर (महाराष्ट्र, भारत): आदिवासी समाज की पहचान, संवैधानिक अधिकारों एवं सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर गुरुवार को यहाँ संविधान चौक पर सैकडों आदिवासियों ने दिन भर धरना आंदोलन किया।
आंदोलनकर्ताओं की मांग थी कि राष्ट्रपति आदिवासियों को “वनवासी” कहकर संबोधित करने पर प्रतिबंध लगाएं, डिलिस्टिंग (Delisting) की प्रक्रिया पर रोक लगाएं तथा आदिवासी समाज के लिए स्वतंत्र धर्मकोड जारी करने के प्रस्ताव को विशेषाधिकार का प्रयोग कर मंजूरी प्रदान करें। आंदोलन के दौरान आदिवासियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी को अपनी मांगो का एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को प्रेषित किया गया।
प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से विस्तृत चर्चा कर आदिवासी समाज की भावनाओं एवं मांगों से उन्हें अवगत कराया। जिलाधिकारी ने निवेदन स्वीकार कर संबंधित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष हरीश उईके के नेतृत्व में आयोजित यह आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों ने आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाई।
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